यूपी में गो संरक्षण के लिए सरकार की नई नीति, महिलाओं को भी बनाएंगे भागीदार
09 मार्च 2026, भोपाल: यूपी में गो संरक्षण के लिए सरकार की नई नीति, महिलाओं को भी बनाएंगे भागीदार – उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण के लिए सरकार ने नई नीति को लागू किया है और इसमें विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी भागीदार बनाया जाएगा. इसके अलावा किसान उत्पादक संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा. सरकार का यह मानना है कि महिलाओं और किसान उत्पादक संगठनों के सहयोग से गोशालाओं के संचालन में तो आसानी होगी ही वहीं ग्रामीणों की आय में भी बढ़ोतरी हो सकेगी.
प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि गौ सेवा और गो संरक्षण को केवल परंपरा तक सीमित रखने के बजाय इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाए. इसी दिशा में गो आश्रय स्थलों के संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों और एफपीओ को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है. इससे गोवंश की देखभाल बेहतर तरीके से हो सकेगी और गांवों में आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे.
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य में गो संरक्षण को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है. योगी सरकार का लक्ष्य है कि इस मिशन को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत किया जाए, ताकि गो संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर सामाजिक अभियान का रूप ले सके. राज्य सरकार ने इस दिशा में बड़ा वित्तीय प्रावधान भी किया है. प्रदेश में पहली बार गो संरक्षण के लिए 2000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है, जबकि वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किए गए हैं.
इस प्रकार कुल 2100 करोड़ रुपये गो संरक्षण मिशन पर खर्च किए जाएंगे. प्रदेश में इस समय लगभग 7500 गो आश्रय स्थल संचालित हो रहे हैं, जहां 12,38,547 निराश्रित गोवंश को आश्रय दिया गया है. इसके अलावा 155 वृहद गो संरक्षण केंद्रों का निर्माण भी विभिन्न जिलों में जारी है. सरकार का लक्ष्य इन केंद्रों को भविष्य में आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित करना है.
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