राज्य कृषि समाचार (State News)

उज्जैन: नरवाई प्रबंधन में आधुनिक तकनीक अपनाकर विशाल बने प्रेरणास्रोत

27 मार्च 2026, उज्जैनउज्जैन: नरवाई प्रबंधन में आधुनिक तकनीक अपनाकर विशाल बने प्रेरणास्रोत – जिले के बड़नगर विकासखंड के ग्राम सरसाना के युवा किसान श्री विशाल गुर्जर ने नरवाई प्रबंधन में आधुनिक तकनीक अपनाकर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। उन्होंने फसल अवशेष (नरवाई) को जलाने की पारंपरिक प्रथा को त्यागकर रोटावेटर का उपयोग कर मिट्टी में ही नरवाई को मिलाकर जैविक खाद में परिवर्तित करने की प्रक्रिया अपनाई है।

श्री विशाल गुर्जर, जो अपनी मेहनत और नवाचार से खेती को लाभदायक बना रहे हैं, ने बताया कि “नरवाई जलाने से मिट्टी की उपयोगी सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। कार्बन की मात्रा कम होती है और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। रोटावेटर से नरवाई को अच्छी तरह काटकर मिट्टी में मिलाने पर यह प्राकृतिक खाद बन जाती है, जिससे अगली फसल की पैदावार बढ़ती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता भी कम होती है।”रोटावेटर के उपयोग से उन्हें कई लाभ हुए हैं । नरवाई प्रबंधन में समय और श्रम की बचत, मिट्टी की संरचना में सुधार व उर्वरता बढ़ोतरी, धुआँ और प्रदूषण से मुक्ति, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों सुरक्षित, लागत में कमी और बेहतर फसल उत्पादन जैसे लाभ प्राप्त हुए।

बड़नगर विकासखंड के कृषि अधिकारी तथा स्थानीय कृषि विभाग ने इस पहल की सराहना की है और इसे अन्य किसानों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। श्री विशाल गुर्जर का यह कदम “किसान कल्याण वर्ष” तथा नरवाई प्रबंधन की सरकारी योजनाओं की भावना से पूरी तरह मेल खाता है, जिसमें रोटावेटर, सुपर सीडर, मल्चर आदि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है।यह सफलता की कहानी साबित करती है कि छोटे-छोटे नवाचार और सही यंत्रों के उपयोग से किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी कर सकते हैं। ग्राम सरसाना के इस प्रगतिशील किसान ने दिखा दिया कि आधुनिक तकनीक और पर्यावरण अनुकूल खेती का संयोजन ही भविष्य की कृषि है।किसानों से अपील है कि अन्य किसान भाई भी नरवाई न जलाएं, रोटावेटर या अन्य अनुदानित यंत्रों का उपयोग करें और मिट्टी-पर्यावरण दोनों को बचाएं।  

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