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राज्य कृषि समाचार (State News)

बालाघाट में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी संपन्न

14 फरवरी 2026, बालाघाट: बालाघाट में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी संपन्न – राजा भोज कृषि महाविद्यालय बालाघाट द्वारा  गत दिनों  प्राकृतिक खेती विषय पर दो दिवसीय वेब-आधारित संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस ऑनलाइन संगोष्ठी में देश-विदेश से 300 से अधिक छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों एवं प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।  संगोष्ठी का मुख्य आकर्षण पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती के प्रणेता डॉ. सुभाष पालेकर का विशेष व्याख्यान रहा। उन्होंने अपने संबोधन में प्राकृतिक खेती के मूल सिद्धांतों और आधार स्तंभों की विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. पालेकर ने खेत में ही उपलब्ध संसाधनों से बीजामृत, जीवामृत, दशपर्णी अर्क और आग्नेयास्त्र जैसे जैविक घोल तैयार करने की विधियों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने प्राकृतिक खेती में देशी गाय और देशी बीजों के महत्व पर विशेष जोर दिया तथा किसानों से रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।  संगोष्ठी में अन्नामलाई यूनिवर्सिटी तमिलनाडु के सेंटर फॉर नेचुरल फॉर्मिंग एंड सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के निदेशक डॉ. आर. रमन ने प्राकृतिक खेती से जुड़े शोध कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने मृदा में कार्बन स्तर बढ़ाने की विभिन्न वैज्ञानिक विधियों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान श्री अशोक मीना ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे पिछले 16 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और इस पद्धति से उन्हें बेहतर उत्पादन एवं कम लागत का लाभ मिला है। उन्होंने किसानों को जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। संगोष्ठी की आयोजक एवं राजा भोज कृषि महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. पूजा गोस्वामी ने कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छात्र और किसान ही देश की कृषि व्यवस्था की मजबूत नींव हैं। यदि हमें प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढ़ना है तो इन दोनों वर्गों को सशक्त और जागरूक बनाना होगा। उन्होंने बताया कि बालाघाट जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए महाविद्यालय निरंतर प्रयास कर रहा है।

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महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. घनश्याम देशमुख ने इस आयोजन की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने भविष्य में भी प्राकृतिक खेती से संबंधित संगोष्ठी एवं कार्यशालाओं के आयोजन का आश्वासन दिया, ताकि अधिक से अधिक किसान और विद्यार्थी इससे लाभान्वित हो सकें।   यह वेब संगोष्ठी प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई, जिससे किसानों और विद्यार्थियों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों की उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई।

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