सोयाबीन- गेहूं फसल प्रणाली आधारित उत्पादन तकनीकी पर प्रशिक्षण संपन्न
14 मार्च 2026, इंदौर: सोयाबीन- गेहूं फसल प्रणाली आधारित उत्पादन तकनीकी पर प्रशिक्षण संपन्न – भा.कृ.अनु.प.-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा मध्य प्रदेश के मालवा एवं निमाड़ क्षेत्र के लिए सोयाबीन- गेहूं फसल प्रणाली आधारित उत्पादन तकनीकी” विषय पर गत दिनों तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मालवा एवं निमाड़ क्षेत्र के 14 जिलों से आए 27 अधिकारियों ने भाग लिया।
इस प्रशिक्षण में राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान तथा क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र, इंदौर के वैज्ञानिकों ने सोयाबीन आधारित फसल प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर कृषि अधिकारियों से चर्चा की तथा सोयाबीन एवं गेहूं फसल की उन्नत किस्में, उत्पादन तकनीक, कीट एवं रोग
प्रबंधन के तरीकों सहित, विपणन तथा आर्थिक आय में वृद्धि हेतु सोयाबीन- गेहूं के मूल्य संवर्धन हेतु प्रसंस्करण एवं खाद्य पदार्थों मे उपयोग जैसे समानांतर विषयों पर व्याख्यान दिए। NSRI के एग्री बिजनेस केंद्र में खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. नेहा पाण्डेय के मार्गदर्शन मे सोया आधारित सोया दुग्ध, टोफू, नमकीन, सोया छाछ, सेव, कुकीज सहित रेडी-टू-ईट उपमा, हलवा जैसे खाद्य पदार्थों का सजीव प्रदर्शन किया गया।संस्थान के डॉ. बी. यु. दुपारे द्वारा सोयाबीन फसल की उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीकी के प्रचार- प्रसार में संस्थान के सोशल मीडिया की उपयोगिता, डॉ विशाल थोरात द्वारा सोयाबीन खेती का आर्थिक विश्लेषण तथा रोग प्रबंधन हेतु उपयुक्त तकनीक पर डॉ. संजीव गुप्ता ने एन्थ्रेक्नोज, रायजोक्तोनिया, एरियल ब्लाइट, पीला मोजेक वायरस जैसे रोगों की पहचान एवं नियंत्रण के प्रभावी तरीकों पर चर्चा की गई ।
प्रशिक्षण के अंतिम सत्र में IARI क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र, के अध्यक्ष, डॉ. जे. बी. सिंह ने गेहूं की उन्नत किस्म Hi -1650 (पूसा ओजस्वी), Hi-8823(पूसा प्रभात),Hi -1665 (पूसा शरबती) आदि किस्मों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया की गेहूं फसल में समय से सिंचाई करें । डॉ. राहुल गजघाटे द्वारा गेहूं में मूल्य संवर्धन हेतु मालवी गेहूं का उपयोग, डॉ. टी.एल. प्रकाश द्वारा गेहूं फसल में रोग नियंत्रण तथा डॉ. राज पाल मीणा द्वारा उर्वरक, पोषण एवं सिंचाई प्रबंधन जैसी उपयोगी जानकारी पर चर्चा की। वहीं समापन सत्र में सोयाबीन संस्थान के निदेशक डॉ. के.एच. सिंह ने मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रायोजित परियोजना के उद्देश्यों एवं कार्ययोजना की जानकारी दी। यह परियोजना प्रदेश के 18 जिलों इंदौर, धार, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, बड़वानी, झाबुआ, अलीराजपुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, देवास, सीहोर एवं भोपाल में संचालित है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शीघ्र अवधि वाली सोयाबीन किस्म JS 95-60 के स्थान पर NRC 150 सोयाबीन किस्म को प्रोत्साहित किया, ताकि आगामी रबी फसल की उत्पादकता प्रभावित हुए बिना सोयाबीन की उपज में वृद्धि की जा सके। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में किए गए प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप मध्यम अवधि वाली सोयाबीन किस्म NRC 142 को अपनाने से किसानों को 2 से 4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त हुआ है। आगामी वर्ष में JS -2172, को भी इस परियोजना में शामिल किया जाएगा ।
मध्य प्रदेश के कृषि विभाग द्वारा प्रायोजित इस परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश एवं मालवा के कुल 18 जिलों में विगत दो वर्षों से सोयाबीन एवं गेहूं फसलों फसल पर कुल 180 प्रदर्शन प्लाटों का आयोजन तथा कृषकों एवं अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सत्रों के आयोजन से सोयाबीन की नवीनतम किस्म जैसे NRC-150, NRC-142, तथा गेहूं की HI-1650, HI-1665, HI-8823, पूसा ओजस, पूसा अहिल्या जैसी किस्मों को कृषकों द्वारा पसंद किया जा रहा है ।कृषि विभाग के अधिकारियों ने सुझाव दिया कि इस तरह के प्रशिक्षण सोयाबीन एवं गेहूं बुवाई से पहले दिया जाए जिससे किसानों को समय से सूचना मिल सके और परियोजना किसानों के बीच कारगर सिद्ध हो सके l अंत में सभी प्रशिक्षणार्थियों कों प्रमाण पत्र वितरित किये गये. समापन कार्यक्रम का संचालन श्री श्याम किशोर वर्मा ने किया तथा डॉ. विशाल थोराट द्वारा आभार व्यक्त किया गया।
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