सब्जी फसलों में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन पर नासिक में प्रशिक्षण, किसानों तक पहुंचेगी सुरक्षित खेती की तकनीक
17 जनवरी 2026, भोपाल: सब्जी फसलों में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन पर नासिक में प्रशिक्षण, किसानों तक पहुंचेगी सुरक्षित खेती की तकनीक – भारत सरकार के वनस्पति संरक्षण संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के उपक्रम कार्यालय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र (CIPMC), नासिक द्वारा सब्जी फसलों में “एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (IPM)” विषय पर दीर्घकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह एक माह का गहन प्रशिक्षण प्रादेशिक कृषि विस्तार व्यवस्थापन प्रशिक्षण संस्था (RAMETI), नासिक में संपन्न हुआ।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्य के कृषि विभाग के 40 अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि अधिकारियों को आईपीएम की आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाना था, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग में कमी और सुरक्षित व टिकाऊ सब्जी उत्पादन के लिए प्रेरित कर सकें।
प्रशिक्षण का समापन समारोह संपन्न
प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह मुख्य अतिथि डॉ. सुनीता पांडेय, संयुक्त निदेशक, आईपीएम एवं टिड्डी विभाग, मुख्यालय फरीदाबाद की उपस्थिति में आयोजित किया गया। समारोह में विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश महाजन, सहायक निदेशक, रामेती नासिक (कृषि विभाग, महाराष्ट्र) एवं डॉ. मनीष मोंढे, उप निदेशक, क्षेत्रीय केंद्रीय आईपीएम केंद्र, नागपुर भी उपस्थित रहे।
किसानों तक सही तकनीक पहुंचाना उद्देश्य
इस अवसर पर कार्यालय प्रमुख डॉ. अतुल ठाकरे, उप निदेशक, केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, नासिक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि सीआईपीएमसी नासिक की टीम एवं निदेशालय के विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से इस 30 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कृषि अधिकारियों को आईपीएम की वैज्ञानिक तकनीकों में निपुण बनाना है, ताकि वे किसानों को घटती लागत, सुरक्षित उत्पादन और टिकाऊ खेती की ओर मार्गदर्शन दे सकें।
रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटाने पर जोर
मुख्य अतिथि डॉ. सुनीता पांडेय ने कहा कि यह प्रशिक्षण केंद्र और राज्य के कृषि अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज खेती में रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है, जिससे न केवल किसानों की लागत बढ़ती है बल्कि कीटनाशक अवशेष जैसी गंभीर समस्या भी उत्पन्न हो रही है। ऐसे में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन एक प्रभावी और लाभकारी विकल्प है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सब्जी फसलों में कीट, रोग एवं खरपतवार प्रबंधन से संबंधित सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, क्षेत्र भ्रमण और प्रदर्शन भी कराया गया। इससे अधिकारी आईपीएम तकनीकों को खेत स्तर पर प्रभावी रूप से लागू कर सकेंगे।
एनपीएसएस मोबाइल ऐप से किसानों को मिलेगी मदद
डॉ. पांडेय ने जानकारी दी कि किसान एनपीएसएस मोबाइल ऐप के माध्यम से समय रहते कीट एवं रोग की पहचान कर उनके प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक सलाह प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रशिक्षित अधिकारी गांवों में जाकर किसानों को सही जानकारी देंगे, तभी इस प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता सुनिश्चित होगी।
सुरक्षित और टिकाऊ खेती की दिशा में अहम पहल
कार्यक्रम के अंत में डॉ. शरद मधुकर गायकवाड, वनस्पति संरक्षण अधिकारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सब्जी उत्पादन में सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने और स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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