राज्य कृषि समाचार (State News)

सिवनी में श्री तकनीक का प्रशिक्षण आयोजित किया

Share

11 जून 2024, सिवनी: सिवनी में श्री तकनीक का प्रशिक्षण आयोजित किया – कृषि विज्ञान केंद्र सिवनी की दर्पण सभागार में धान की उत्तम खेती हेतु एस आर आई (श्री) तकनीकी का प्रशिक्षण का आयोजन किया गया श्री पद्धति से धान की खेती हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम में डी. एस. ग्रुप के अंतर्गत ग्राम कुरई, बरघाट एवं सिवनी के लगभग 40 से अधिक कृषकों ने भाग लिया।

 धान में एस आर आई पद्धति से खेती करने के विषय में केंद्र के प्रमुख डॉ. शेखर सिंह बघेल ने बताया कि धान की खेती में परंपरागत खेती से उत्पादन श्री पद्धति से उत्पादन अधिक प्राप्त होता है श्री पद्धति जिसे सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसीफिकेशन (एस. आर. आई) या धान की मेडागास्कर पद्धति के नाम से जाना जाता है ,जिसे फ्रांस के धर्मगुरु फादर हेनरी दी लौलाने ने 1980 के दशक के दौरान मेडागास्कर में धान की श्री पद्धति का विकास किया थ। वर्तमान में धान की श्री पद्धति पानी की बचत के साथ ही प्रति हेक्टेयर कम बीज उपयोग एवं अधिक उत्पादन की दृष्टिकोण से उत्तम तकनीक है।

धान की श्री पद्धति से खेती हेतु तकनीकी मार्गदर्शन बीज का चुनाव, खेत की तैयारी एवं महत्वपूर्ण तकनीकी मार्गदर्शन वैज्ञानिक डॉ. निखिल सिंह द्वारा प्रदान किया गया। इसके अलावा वर्तमान में धान की खेती में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के विषय में विस्तार से जानकारी डॉ. के. के. देशमुख मृदा वैज्ञानिक द्वारा प्रदान की गई धान की मुख्य खरीफ फसलों के उत्पादन तकनीक पर किसानों के साथ वैज्ञानिकों की परिचर्चा भी आयोजित की गई।  

कार्यक्रम के समापन पर उपसंचालक कृषि श्री मोरिस नाथ  द्वारा कृषकों को मृदा स्वास्थ्य पत्रक  वितरित  किए गए। , कार्यक्रम का संचालन श्री राजेंद्र सिंह ठाकुर वैज्ञानिक द्वारा किया गया एवं आभार प्रदर्शन डी. एस. ग्रुप के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर श्री संदीप शर्मा द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र  के  समस्त वैज्ञानिक  डॉ. शेखर सिंह बघेल, डॉ. के. के. देशमुख, डॉ. निखिल सिंह, डॉ. राजेन्द्र  सिंह  ठाकुर, डॉ. जी. के. राणा, इंजी. कुमार सोनी,  श्रीमती करूणा मेश्राम पगारे ने अपना मार्गदर्शन प्रदान किया।

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्रामव्हाट्सएप्प)

Share
Advertisements