कपास पर गुलाबी सुंडी का खतरा: सिरसा में सतर्कता, जानें बचाव के लिए दवा और मात्रा
06 सितंबर 2026, सिरसा (हरियाणा): कपास पर गुलाबी सुंडी का खतरा: सिरसा में सतर्कता, जानें बचाव के लिए दवा और मात्रा – हरियाणा के प्रमुख कपास उत्पादक जिले सिरसा में कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) का प्रकोप देखा गया है। कृषि विभाग के क्षेत्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्र, फरीदाबाद और सिरसा के संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) कार्यालय ने संयुक्त रूप से किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर (इकोनॉमिक थ्रेशोल्ड लेवल) से नीचे है, इसलिए किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन बदलते मौसम और फसल की अवस्था को देखते हुए नियमित निगरानी जरूरी बताई गई है।
कैसे पहचानें प्रकोप और निगरानी के उपाय
गुलाबी सुंडी सबसे पहले कपास के फूल और टिंडों के अंदर घुसकर नुकसान पहुंचाती है, इसलिए ऊपर से फसल स्वस्थ दिखने पर भी नुकसान का पता देर से चलता है। सिरसा जिला कृषि कार्यालय के संयुक्त निदेशक अत्मा राम गोदारा के मुताबिक किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाने चाहिए, ताकि कीट पतंगों की संख्या पर नजर रखी जा सके।रस चूसक कीटों जैसे सफेद मक्खी की निगरानी के लिए 20 पीले या नीले चिपचिपे ट्रैप (स्टिकी ट्रैप) प्रति एकड़ लगाने की भी सलाह दी गई है। इससे समय रहते कीट की पहचान होने पर सही समय पर छिड़काव किया जा सकता है और अनावश्यक दवा के खर्च से भी बचा जा सकता है।फेरोमोन ट्रैप में कीट को आकर्षित करने के लिए खास गंध वाला ल्यूर लगा होता है, जिसमें फंसे पतंगों की गिनती से यह अंदाजा लगाया जाता है कि छिड़काव की जरूरत है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि अकेले पतंगे दिखने पर तुरंत दवा छिड़कने के बजाय संख्या पर नजर रखनी चाहिए।
नियंत्रण के लिए दवा और मात्रा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (ICAR-CICR) की सामान्य सिफारिशों के मुताबिक गुलाबी सुंडी की संख्या आर्थिक क्षति स्तर पार करने पर ही रासायनिक छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव के लिए स्पाइनटोरम 11.7 एससी को 0.8 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी, प्रोफेनोफोस 50 ईसी को 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी या एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी को 0.50 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।कृषि अधिकारियों ने साफ किया है कि किसान केवल केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड (CIBRC) से अनुमोदित दवाओं का ही इस्तेमाल करें और बिना जरूरत छिड़काव न करें। समय-समय पर खेत में असमय खिले फूलों को तोड़कर मिट्टी में दबाने से भी कीट के प्रजनन चक्र पर रोक लगती है।एक ही दवा का बार-बार इस्तेमाल करने से कीट में उसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है, इसलिए विशेषज्ञ अलग-अलग रासायनिक समूह की दवाओं को बदल-बदल कर इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। छिड़काव शाम के समय करना बेहतर माना जाता है, जब तापमान कम होता है और दवा का असर ज्यादा देर तक बना रहता है।अधिकारियों के मुताबिक इस साल हरियाणा में कपास का रकबा कमजोर बारिश के चलते घटकर करीब 3.11 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 3.94 लाख हेक्टेयर था। ऐसे में बची हुई फसल को कीट प्रकोप से बचाना किसानों के लिए और जरूरी हो गया है।
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