सरकारी योजनाएं (Government Schemes)राज्य कृषि समाचार (State News)

‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना से बदली ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर, ड्रोन तकनीक से बनीं आत्मनिर्भर

04 जनवरी 2026, भोपाल: ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना से बदली ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर, ड्रोन तकनीक से बनीं आत्मनिर्भर – ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार की ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना एक सशक्त पहल के रूप में सामने आई है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि तकनीक से भी जोड़ रही है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से महिलाएं अब खेती में उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव जैसी सेवाएं देकर सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं।

योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है। इसके तहत महिलाओं को ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अनुदान पर ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे स्वरोजगार स्थापित कर सकें।

ड्रोन पायलट बन रहीं ग्रामीण महिलाएं

‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के अंतर्गत महिलाओं को ड्रोन उड़ाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाएं कृषि कार्यों में ड्रोन के जरिए उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़काव की सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इससे किसानों को कम लागत में सटीक और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं, वहीं महिलाओं की आमदनी में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

वर्तमान में प्रदेश में 89 महिलाओं को ड्रोन पायलट प्रशिक्षण देकर सक्षम बनाया जा चुका है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में एक हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।

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ड्रोन खरीद पर 80 प्रतिशत तक अनुदान

योजना को महिलाओं के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा ड्रोन क्रय पर विशेष सहायता दी जा रही है। लगभग 10 लाख रुपये लागत वाले ड्रोन पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। हितग्राही महिला को केवल 50 हजार रुपये का अंशदान करना होता है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के लिए यह योजना बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

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सपना काछी बनीं ड्रोन दीदी, बढ़ी आय

जबलपुर विकासखंड के ग्राम गोकलपुर निवासी सपना काछी इस योजना की सफलता की एक जीवंत मिसाल हैं। पहले सामान्य गृहिणी रहीं सपना ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर सिलाई, कृषि सखी और ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण प्राप्त किया। ड्रोन तकनीक अपनाने के बाद उन्होंने अब तक करीब 1200 एकड़ में स्प्रे कर 2.86 लाख रुपये की आय अर्जित की है। वर्तमान में उनकी मासिक आय 30 से 35 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है।

कविता चौहान की मेहनत को मिली नई पहचान

खंडवा जिले के रेवापुर गांव की कविता चौहान भी ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। ड्रोन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने अब तक 2500 एकड़ से अधिक खेतों में छिड़काव कर 7.68 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है। कविता को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर भी मिला, जो उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण रहा।

ड्रोन सेवा से किसानों को भी लाभ

ड्रोन के माध्यम से किया जाने वाला छिड़काव समय और श्रम की बचत करता है। खाद और दवाइयों का समान व सटीक छिड़काव होने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार हो रहा है। कई जिलों में किसान इफको किसान उदय मोबाइल एप के माध्यम से ड्रोन सेवा मंगवा रहे हैं, जिससे खेती और अधिक आधुनिक बन रही है।

महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल

‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मविश्वास, तकनीक और स्वावलंबन का प्रतीक बन चुकी है। यह योजना न केवल महिलाओं की आय बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें समाज में नई पहचान और सम्मान भी दिला रही है। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में यह पहल कृषि और महिला सशक्तिकरण दोनों क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

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