Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने बागवानी की 8 योजनाओं के लिए 491 करोड़ और सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,607 करोड़ रुपये मंजूर किए

23 सितंबर 2026, भोपाल: मध्य प्रदेश कैबिनेट ने बागवानी की 8 योजनाओं के लिए 491 करोड़ और सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,607 करोड़ रुपये मंजूर किए–  मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए आठ राज्य-वित्त पोषित योजनाओं पर अगले पांच साल में 491 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। साथ ही राज्य कैबिनेट ने तीन बड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर 2,607 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च को भी हरी झंडी दिखाई है, जिनसे करीब 1.27 लाख हेक्टेयर खेती की जमीन को सिंचाई सुविधा मिलेगी। यह फैसला 15 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।

बागवानी की आठ योजनाओं को मिली मंजूरी

राज्य सरकार के मुताबिक 491 करोड़ रुपये की यह राशि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक यानी पांच साल में खर्च होगी। इसका मकसद किसानों की आय बढ़ाना, बागवानी फसलों की गुणवत्ता और रकबा बढ़ाना तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देना बताया गया है।

इसमें फल पौधरोपण के लिए 100 करोड़ रुपये, मसाला क्षेत्र विस्तार के लिए 100 करोड़ रुपये, संरक्षित खेती यानी पॉलीहाउस-शेडनेट के लिए 85 करोड़ रुपये, फसल बीमा के लिए 53 करोड़ रुपये और खाद्य प्रसंस्करण विकास के लिए 53 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके अलावा कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के लिए 50 करोड़ रुपये तथा किसान प्रशिक्षण व विभागीय रखरखाव के लिए 25-25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

तीन सिंचाई परियोजनाओं पर 2,607 करोड़ रुपये खर्च होंगे

कैबिनेट ने उज्जैन जिले में क्षिप्रा नदी पर बनने वाली चिटावद वृहद सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी है, जिस पर 1,846.05 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इससे करीब 65,000 हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। सिंगरौली जिले की गौंड वृहद परियोजना पर 749.62 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे 34,500 हेक्टेयर क्षेत्र को फायदा मिलेगा।

अशोकनगर जिले की चंदेरी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 11.49 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जो करीब 28,000 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेगी। इसी बैठक में राज्य सरकार ने मार्कफेड को खाद्यान्न ऋण चुकाने के लिए 2,220.62 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण देने का भी फैसला किया, जिसे 30 सितंबर 2026 तक चुकाना है।

सरकार ने अभी इन योजनाओं के तहत किसानों को मिलने वाले अनुदान की पात्रता शर्तें और आवेदन प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं की है। इसके लिए संबंधित विभागों के दिशा-निर्देश आने वाले दिनों में जारी होने की उम्मीद है, इसलिए किसानों को अपने जिले के उद्यानिकी विभाग कार्यालय से संपर्क में रहना चाहिए।

पांच साल की योजना से मिलेगी स्थिरता

राज्य सरकार के मुताबिक इन योजनाओं को एकमुश्त एक साल के बजाय पांच साल के लिए मंजूर करने का मकसद यह है कि बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े किसानों व उद्यमियों को हर साल नई मंजूरी का इंतजार न करना पड़े। इससे पॉलीहाउस, कोल्ड चेन और प्रसंस्करण इकाई जैसे बड़े निवेश वाले कामों की दीर्घकालिक योजना बनाना आसान होगा।

वहीं तीनों सिंचाई परियोजनाएं पूरी होने में आमतौर पर कई साल लगते हैं, ऐसे में उज्जैन, सिंगरौली और अशोकनगर के किसानों को इनका पूरा फायदा मिलने में कुछ समय लगेगा। इस बीच राज्य सरकार ने मार्कफेड को दिए ब्याज-मुक्त ऋण से यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता खाद्यान्न खरीद प्रणाली को वित्तीय रूप से मजबूत बनाए रखना भी है, ताकि आगामी रबी सीजन में उपज खरीद में कोई रुकावट न आए।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture