‘लखपति दीदी’ की अवधारणा खंडवा जिले में हो रही साकार
06 जनवरी 2026, खंडवा: ‘लखपति दीदी’ की अवधारणा खंडवा जिले में हो रही साकार – प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने गत दिनों जिले के खालवा विकासखंड के ग्राम रोशनी में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत स्वीकृत लगभग 1.36 करोड़ रुपए लागत के इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के निर्माण कार्य का भूमि पूजन कर शुभारंभ किया।
इस मौके पर पर मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ‘लखपति दीदी ‘की अवधारणा को खंडवा जिले में साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्व सहायता समूह की महिलाएं सब्जी उत्पादन, मत्स्य उत्पादन और पशुपालन जैसी गतिविधियों को एक साथ करके आसानी से लखपति बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अन्य गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रमिला बाई, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉक्टर नागार्जुन बी. गौड़ा के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के तहत ग्राम रोशनी में लगभग 1.36 करोड़ रुपए लागत से पॉन्ड बायोफ्लॉक, बायोफ्लोक 7 टैंक और केज कल्चर का निर्माण किया जाएगा। मंत्री डॉ शाह ने कहा कि हरसूद विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य लगातार जारी हैं l उन्होंने कहा कि ग्राम रोशनी में तालाब निर्माण से आसपास के गांव में भी भूजल स्तर बढ़ेगा और कृषि उत्पादन में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि रोशनी में जनजाति कार्य विभाग के दो और छात्रावास निर्मित कराए जाएंगे। हरसूद और खालवा के महाविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए वाहन की सुविधा उपलब्ध है। अगले शिक्षा सत्र से यह व्यवस्था की जाएगी कि हरसूद और खालवा के महाविद्यालय तक इन वाहनों से ग्राम रोशनी के विद्यार्थी भी कॉलेज तक आ जा सकें।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ नागार्जुन गौडा ने बताया कि ग्राम रोशनी में गौशाला संचालन के साथ-साथ तालाब में मत्स्य पालन गतिविधियां प्रारंभ करने से गांव के स्वसहायता समूहों की महिलाओं की आय बढ़ेगी। जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर होगी। उन्होंने बताया कि रोशनी एवं आसपास के गांव की आदिवासी वर्ग की महिलाओं को स्वरोजगार संबंधित ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी, ताकि वे छोटे-मोटे व्यवसाय शुरू करके अपने परिवार का अच्छी तरह पालन पोषण कर सकें।
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