राज्य कृषि समाचार (State News)

अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन परियोजना की 32वीं वार्षिक समीक्षा बैठक का हुआ समापन

किसानों की जागरूकता खरपतवार प्रबंधन का प्रमुख औजार

27 मई 2025, ग्वालियर: अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन परियोजना की 32वीं वार्षिक समीक्षा बैठक का हुआ समापन – किसानो की जागरूकता खरतपतवार प्रबंधन का प्रमुख औजार है। यही औजार फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है। इस समय किसानों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती खरपतवार का प्रबंधन करना है क्योंकि यह खरपतवार फसलीय क्षेत्र व गैर फसलीय क्षेत्र को प्रभावित करता है, या यूँँ कहा जाये कि यह अपना प्रभाव सभी जगह छोड़ता है या दिखाता है जैसे कि तालाब, कच्चे रास्ते, खाली पड़ी जमीन, भवन और खेत इनके प्रमुख स्थान होते है। इन सभी जगहों पर खरपतवार का प्रबंधन कर अपनी फसलों को सुरक्षित रखे जाने के संबंध में देश भर से आये 50 से अधिक कृषि वैज्ञानिकों ने अपने-अपने शोध व अनुभव साझा किये। उल्लेखनीय है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन परियोजना की 32वी वार्षिक समीक्षा बैठक का समापन हुआ।

इस अवसर पर खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर के निदेशक डॉ. जे. एस. मिश्रा ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या गाजरघास और तालाबों में जलकुम्भी बनी हुई है। इनके सम्पर्क में आने पर त्वचा संबंधी समस्याऐं तो उत्पन्न होती ही है यह फसल की उत्पादकता को भी घटा देती है। खरपतवार प्रबंधन किस तरह से किया जा सके इसको लेकर देश भर के वैज्ञानिकों ने इस पर शोध किया और नयी-नयी तकनीके इजाद की जिनका प्रयोग कर किसान खरपतवार का प्रबंधन कर सकता है और फसल पैदावार को बढ़ाया जा सकता है।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उप सहायक निदेशक डॉ. एस भास्कर ने बताया कि वैज्ञानिकों ने खरपतवार प्रबंधन को लेकर ड्रोन तकनीक का प्रयोग अलग-अलग फसलों पर किया जिसमें उन्होंने खरपतवार पर नियंत्रण करने में सफलता हासिल की। वैज्ञानिकों ने बताया कि ड्रोन का उपयोग किस मौसम में, किस ऊँचाई पर कितनी दवा का प्रयोग करना चाहिए। इसी तरह से जलीय खरपतवार को किस तरह से नियंत्रण करना चाहिए। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. आर. पी. दुबे ने बताया कि खरपतवार प्रबंधन को लेकर जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है। जिस तरह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है उसमें खरपतवार की पैदावार बड़ रही है। जिसकी रोकथाम के लिये उपकरण एवं दवाओं के प्रयोग पर वैज्ञानिक कार्य कर रहें है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. ए.के. नायक, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. ए. वेलुमुरूगन, सहायक महानिदेशक (मृदा एवं जल प्रबंधन), भा.कृ.अ.प., नई दिल्ली कार्यशाला से वर्चुअल माध्यम से जुड़े। कार्यशाला का संचालन डॉ. एकता जोशी, वैज्ञानिक, सस्यविज्ञान एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीरज हाडा, प्रधान अन्वेषक, ग्वालियर द्वारा किया गया।

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20 राज्यों से आये 50 से अधिक वैज्ञानिकों ने खरपतवार प्रबंधन को लेकर अपने तकनीकों पर किये जा रहे अनुसंधान कार्याे और अनुभवों को एक-दूसरे से साझा किया। इन तकनीकी कार्यक्रमों में बताया गया कि वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान अपने खेत में किस तरह से खरपतवार को पहचाने और किस तरह से उसका प्रबंधन करें। वैज्ञानिकों द्वारा खरपतवार प्रबंधन पर जो शोध किये गये उनको भी तकनीकी सत्रों में साझा किये।

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