तमिलनाडु: सहकारी समितियों को फसल लोन वसूली रोकने का आदेश, 30 सितंबर तक पात्र किसानों को मिलेगा नया कर्ज
24 सितंबर 2026, चेन्नई: तमिलनाडु: सहकारी समितियों को फसल लोन वसूली रोकने का आदेश, 30 सितंबर तक पात्र किसानों को मिलेगा नया कर्ज – तमिलनाडु सरकार ने राज्य की सहकारी बैंकों और समितियों को फसल कर्ज की वसूली तत्काल रोकने का निर्देश दिया है। सहकारिता विभाग की रजिस्ट्रार जी. लता ने बीते सोमवार को इस बारे में एक सर्कुलर जारी किया, जो अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।
यह फैसला उन किसानों की शिकायतों के बाद लिया गया है जिन्हें सरकार की कर्ज माफी योजना के तहत केवल आंशिक राहत मिली थी। शेष बकाया न चुका पाने की स्थिति में इन किसानों के खिलाफ सहकारी संस्थाएं सख्त वसूली कार्रवाई कर रही थीं।
क्यों उठाया गया यह कदम
विभाग को शिकायतें मिली थीं कि जिन किसानों को कर्ज माफी योजना के तहत केवल आंशिक राहत मिली, उनसे बाकी बचा हुआ कर्ज सख्ती से वसूला जा रहा था। इसकी वजह से कई किसान डिफॉल्टर (चूककर्ता) की श्रेणी में आ गए। इसके अलावा कुछ सहकारी संस्थाएं पुराना कर्ज चुकता होने के बावजूद नया कर्ज देने में देरी या इनकार कर रही थीं।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सहकारिता विभाग ने वसूली प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी। साथ ही सभी संस्थाओं को निर्देश दिया गया है कि जिन किसानों पर कोई बकाया नहीं है, उन्हें 30 सितंबर 2026 तक नया फसल कर्ज जरूर मंजूर किया जाए। यह तारीख इसलिए भी अहम है क्योंकि खरीफ सीजन में बुआई-कटाई के लिए किसानों को समय पर नकदी की जरूरत होती है।
तमिलनाडु में फसल कर्ज सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के जरिए दिया जाता है, जो गांव स्तर पर किसानों के सबसे नजदीकी और सस्ते कर्ज का जरिया मानी जाती हैं। इन्हीं समितियों के जरिए राज्य सरकार की कर्ज माफी योजना का लाभ भी किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।
आंकड़ों में योजना की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक राज्य में कुल 15,108 करोड़ रुपये का फसल कर्ज वितरित किया गया था। इसमें से 5,932.23 करोड़ रुपये कर्ज माफी योजना के तहत पात्र पाए गए। अब तक इसमें से 5,267 करोड़ रुपये की राशि माफ की जा चुकी है, जिससे राज्य के लगभग 13.34 लाख किसानों को लाभ मिला है।
योजना के तहत हर पात्र किसान का अधिकतम 75,000 रुपये तक का फसल कर्ज माफ किया जाता है, चाहे उसकी जमीन का आकार कुछ भी हो। यानी छोटे और सीमांत किसानों के साथ-साथ बड़ी जोत वाले किसानों को भी इसी सीमा तक राहत मिलती है।
बची हुई राशि, यानी माफी के दायरे से बाहर का हिस्सा, किसानों को खुद चुकाना होता है। विभाग की मौजूदा हिदायत का मकसद यही है कि इस बकाया राशि की वसूली में जल्दबाजी न हो, ताकि किसान डिफॉल्टर घोषित होकर आगे कर्ज पाने से वंचित न रह जाएं। कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वसूली में यह राहत अल्पकालिक जरूर है, लेकिन इससे ग्रामीण साख व्यवस्था पर भरोसा बना रहता है।
फसल कर्ज पर वसूली रुकने से लाखों किसानों को तत्काल राहत मिलेगी, खासकर वे जो आंशिक माफी के बाद बकाया न चुका पाने की वजह से डिफॉल्टर बनने के कगार पर थे। इससे उनकी साख (क्रेडिट हिस्ट्री) सुरक्षित रहेगी और वे आगे भी बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े रह सकेंगे।
30 सितंबर तक नए फसल कर्ज मंजूर होने से किसानों के पास बीज, खाद और अन्य कृषि इनपुट खरीदने के लिए नकदी उपलब्ध होगी। इसका सीधा फायदा बीज-खाद विक्रेताओं, कृषि यंत्र डीलरों और स्थानीय मंडी कारोबार को भी मिलेगा, क्योंकि किसानों की क्रय क्षमता बढ़ने से इनपुट बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद है।
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