खरगोन जिले के चैतराम के मसाला उद्योग तक बढ़ते कदम
28 फरवरी 2026, खरगोन: खरगोन जिले के चैतराम के मसाला उद्योग तक बढ़ते कदम – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा कृषक कल्याण वर्ष 2026 में किसानों को ‘अन्नदाता‘ के साथ साथ ‘सफल उद्यमी‘ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी अनुक्रम में ”समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” की अवधारणा पर कार्य करते हुए जिले के बेड़ियां निवासी श्री चैतराम मालवीया ने परंपरागत कच्ची मिर्च के व्यापार से आगे बढ़कर मसाला उद्योग स्थापित कर आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल पेश की है। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही सोच, सरकारी योजनाओं का लाभ और विभागीय मार्गदर्शन से ग्रामीण क्षेत्रों में भी सशक्त उद्यम खड़े किए जा सकते हैं।
श्री मालवीया पहले मिर्च की खरीद-फरोख्त करते थे। व्यापार के दौरान उन्होंने देखा कि कच्ची मिर्ची को प्रोसेस कर पाउडर बनाने से मूल्यवर्धन होता है और बेहतर आय प्राप्त होती है। इसी अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने मसाला निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के अंतर्गत प्रकरण तैयार किया। योजना के तहत एचडीएफसी बैंक से 40 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें 10 लाख रुपये की अनुदान सहायता शामिल है। इस सहयोग से उन्होंने “सांवरिया उद्योग” की स्थापना की।
वर्तमान में सांवरिया उद्योग में हल्दी, मिर्च एवं धनिया पाउडर का उत्पादन किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 20 से 25 क्विंटल मसाला पाउडर का उत्पादन होता है तथा महीने में करीब 20 दिन उत्पादन कार्य किया जाता है। इस इकाई से 5 स्थानीय श्रमिकों को नियमित रोजगार मिला है। उत्पादों की आपूर्ति देशभर में की जा रही है तथा ऑल इंडिया स्तर पर विपणन एवं निर्यात भी हो रहा है। उद्योग से उन्हें न्यूनतम 10 लाख रुपये का वार्षिक मुनाफा प्राप्त हो रहा है।
गौरतलब है कि मिर्च खरगोन जिले में एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) के अंतर्गत भी शामिल है, जिससे स्थानीय किसानों और उद्यमियों को बाजार से बेहतर जुड़ाव मिल रहा है। चैतराम मालवीया इसी अवसर का लाभ उठाकर सफल उद्यमी बने हैं। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में राज्य सरकार द्वारा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के लिए वार्षिक बजट 2026-27 में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित अनुमान 169 करोड़ 11 लाख रुपये की तुलना में लगभग 18.25% अधिक है। योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर अधिकतम 10 लाख रुपये की सीमा तक 35% अनुदान तथा 3% ब्याज माफी का प्रावधान है।
जिले के युवा, कृषक एवं छोटे व्यवसायी-व्यक्तिगत स्तर पर, किसान उत्पाद संगठन (एफपीओ), स्व सहायता समूह एवं उत्पादक सहकारी समितियां-उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, जिला खरगोन से संपर्क कर नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अथवा मौजूदा इकाइयों के उन्नयन हेतु वित्तीय, तकनीकी एवं व्यावसायिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। आवेदकों की सुविधा के लिए डीपीआर तैयार करने और दस्तावेजी सहायता हेतु जिला रिसोर्स पर्सन भी उपलब्ध कराए गए हैं। चैतराम मालवीया की सफलता कहानी यह संदेश देती है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में किसान और ग्रामीण युवा योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। किसान बन रहे आत्मनिर्भर, यही है नए भारत की पहचान।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

