राज्य कृषि समाचार (State News)

सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम फॉर फर्टिगेशन ‘परियोजना को मिली मंजूरी

बागवानी फसलों में मध्यप्रदेश के किसान नवाचार से होंगे लाभान्वित

24 अगस्त 2025, इंदौर: सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम फॉर फर्टिगेशन ‘परियोजना को मिली मंजूरी – मध्य प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत बागवानी फसलों के लिए ‘सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम फॉर फर्टिगेशन ‘परियोजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्वीकृति दी है। कुल लक्ष्य: 715 यूनिट, खर्च: ₹1431.08 लाख आएगा।  इसका उद्देश्य सिंचाई एवं उर्वरक आपूर्ति को स्वचालित करना है, ताकि किसानों को संतुलित मात्रा में पानी व उर्वरक मिले, जिससे लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण संभव हो सके। इस परियोजना का लाभ मध्य प्रदेश के सभी जिलों के किसानों को होगा। इस नवाचार से  किसान  उर्वरकों का संतुलित अनुप्रयोग कर , सिंचाई दक्षता में वृद्धि, टिकाऊ और आधुनिक कृषि पद्धति को बढ़ावा देकर फसल उत्पादकता / गुणवत्ता में सुधार कर  संचालन लागत में कमी आने से अधिक लाभ कमा पाएंगे।  

तकनीकी विशेषताएं–  “सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम फॉर फर्टिगेशन” परियोजना में  आधुनिक वायरलेस सेंसर, GSM, 4G/5G सपोर्ट, क्लाउड कनेक्टिविटी, सॉइल मॉइस्चर, PH, EC सेंसर; ऑटो एवं मैनुअल मोड,मोबाइल ऐप से रियल टाइम मॉनिटरिंग, तीन साल तक क्लाउड सब्सक्रिप्शन और एक साल फ्री वारंटी भी मिलेगी।

आर्थिक प्रावधान – इस परियोजना में  एक यूनिट की लागत ₹4 लाख निर्धारित है , जिसमें किसानों को 50% सब्सिडी यानी अधिकतम ₹2 लाख की सहायता मिलेगी।  पूरे प्रोजेक्ट का खर्च ₹1431.08 लाख आएगा। जिसका कुल 715 किसानों को मिलेगा सीधा लाभ मिलेगा। फिलहाल  भोपाल 20,इंदौर 20, उज्जैन 20 , जबलपुर 10  और रीवा जिलों के लिए 10  लक्ष्य निर्धारित किए हैं।

किसानों के लिए प्रक्रिया – लाभार्थी के पास कम से कम 0.25 हेक्टेयर भूमि होनी अनिवार्य है। किसानों  को  MPFSTS पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। किसानों का चयन ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया से  होगा।  सफल स्थापना की जियो टैगिंग रिपोर्ट अनिवार्य होगी। अनुदान DBT या बैंक/निर्माता कंपनी के माध्यम से मिलेगा। एक यूनिट की लागत ₹4 लाख निर्धारित है।  किसानों को 50% सब्सिडी यानी अधिकतम ₹2 लाख की सहायता मिलेगी।

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संभावित लाभ–  इस परियोजना से सिंचाई जल एवं उर्वरकों की बचत के साथ ही उत्पादन में वृद्धि और गुणवत्ता सुधार होगा। श्रम लागत में कमी,मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और पर्यावरण की रक्षा होगी।  तकनीकी प्रशिक्षण व जानकारियों की उपलब्धता से किसान उन्नत खेती कर सकेंगे। सरकार के इस नवाचार से मध्य प्रदेश के किसान नवाचार की ओर अग्रसर होंगे, खेती में दक्षता व लाभ बढ़ेगा। पंजीकरण व अन्य जानकारी हेतु जिले के उद्यानिकी विभाग से संपर्क करें।

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