बिहार में प्राकृतिक खेती का बढ़ेगा दायरा, 5,700 हेक्टेयर का लक्ष्य
एक एकड़ तक किसानों को ₹4,000 प्रति एकड़ अनुदान, 800 कृषि सखियां देंगी तकनीकी जानकारी
22 अगस्त 2026, पटना: बिहार में प्राकृतिक खेती का बढ़ेगा दायरा, 5,700 हेक्टेयर का लक्ष्य – बिहार सरकार ने रसायनमुक्त और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 5,700 हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत किसानों को आर्थिक सहायता के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के तहत किसान को अधिकतम एक एकड़ क्षेत्र के लिए ₹4,000 प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाएगा।
बिहार में प्राकृतिक खेती का आधार पहले से तैयार है। राज्य के सभी 38 जिलों में करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 50 हजार किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के विकल्प के रूप में प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल की तकनीक से जोड़ा जाए।
800 कृषि सखियां करेंगी किसानों की मदद
प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए राज्य में 800 कृषि सखियों का चयन किया गया है। इन्हें 5,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। कृषि सखियां किसानों को गोबर, गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, जैविक इनपुट तैयार करने तथा प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी देंगी। इससे किसानों को खेत स्तर पर ही तकनीकी मार्गदर्शन मिल सकेगा।
266 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर
किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक सामग्री और जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य में 266 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर बनाए गए हैं। अब सरकार प्रत्येक तीन क्लस्टर पर दो बायो रिसोर्स सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके अलावा बिहार राज्य जैविक मिशन योजना के तहत पक्का वर्मी कम्पोस्ट पिट, गोबर गैस इकाई और व्यावसायिक वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने पर भी अनुदान दिया जा रहा है।
अनाज से लेकर फल-सब्जियों तक प्राकृतिक खेती
राज्य में प्राकृतिक खेती के तहत धान और गेहूं के अलावा टमाटर, बैंगन, भिंडी, गोभी और मिर्च जैसी सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं ड्रैगन फ्रूट, अमरूद, पपीता और केले जैसी फल फसलों में भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
उत्पादन के साथ बाजार पर भी जोर जरूरी
प्राकृतिक खेती का क्षेत्र बढ़ने के बावजूद किसानों के सामने उत्पादों के उचित बाजार और बेहतर मूल्य की चुनौती बनी हुई है। कुछ किसान बाजार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण प्राकृतिक खेती से दूरी भी बना रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अनुदान और तकनीकी सहायता के साथ प्राकृतिक उत्पादों की पहचान, प्रमाणन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की मजबूत व्यवस्था विकसित करना भी जरूरी है। इससे प्राकृतिक खेती किसानों के लिए पर्यावरण अनुकूल होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी अधिक लाभकारी बन सकेगी।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

