विशिष्ट फसलों एवं कृषि उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्रदान करने की योजना
03 मार्च 2026, भोपाल: विशिष्ट फसलों एवं कृषि उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्रदान करने की योजना – मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य की पारंपरिक एवं विशिष्ट फसलों को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्रदान कर उनकी वैश्विक पहचान स्थापित करने, किसानों को उचित मूल्य दिलाने तथा क्षेत्रीय उत्पादों की संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्तमान में मध्य प्रदेश के प्रमुख कृषि उत्पादों में से बालाघाट का चिन्नौर धान तथा रीवा का सुंदरजा आमको जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। ये दोनों उत्पाद जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के सहयोग से सफलतापूर्वक पंजीकृत किए गए है।
इसके अतिरिक्त, शरबती गेहूं जैसी उच्च गुणवत्ता वाली फसल को भी जीआई टैग प्राप्त है, जो राज्य की कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अन्य उल्लेखनीय कृषि-संबंधित उत्पादों में कुछ क्षेत्रीय लहसुन/प्याज जैसी उपजें शामिल हैं, जिन्हें जीआई संरक्षण मिला हुआ है।
राज्य सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में कम से कम 25 प्रमुख फसलों एवं कृषि उत्पादों को जीआई टैग दिलाना है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा उद्यानिकी विभाग द्वारा इस दिशा में तेजी से कार्यवाही की जा रही है।
हाल के प्रयासों में तीन अतिरिक्त फसलों को जीआई टैग प्रदान करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि एवं उत्पादों की बाजार में अलग पहचान सुनिश्चित होगी।
जीआई टैग प्राप्त उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्राथमिकता मिलती है, नकली उत्पादों से सुरक्षा मिलती है तथा स्थानीय किसानों को ब्रांडिंग के माध्यम से बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।
मुख्यमंत्री तथा कृषि मंत्री द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि सभी संभावित उत्पादों जैसे विशेष धान की किस्में, फल, सब्जियां, मसाले एवं पशुधन उत्पादों की जीआई पंजीकरण प्रक्रिया को तेज किया जाए। किसान, कृषि वैज्ञानिक एवं संबंधित संस्थाएं आवेदन प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करें। जिला स्तर पर कृषि विभाग तथा उद्यानिकी विभाग के अधिकारी किसानों को जागरूक करने एवं आवेदन तैयार करने में सहायता कर रहे हैं।
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