बासमती पर बवाल

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मुख्यमंत्री ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र

08 अगस्त 2020, भोपाल। बासमती पर बवाल म.प्र. के बासमती चावल को भौगोलिक संकेत टैग (जीआई टैग) दिलाने के मामले में बवाल मच गया है। इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सरगर्मी पैदा कर दी है। बासमती को लेकर पंजाब एवं हरियाणा अपना एकाधिकार समझने लगे हैं। इसके विरोध में म.प्र. के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी फ्रंट फुट पर आ गये हैं। उन्होंने भी अपना पक्ष रखते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर म.प्र. के बासमती चावल को शीघ्र जीआई टैग दिलाने का अनुरोध किया है तथा पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के मामले में किए गए हस्तक्षेप की निंदा करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को इस संदर्भ में पत्र लिखा है। उन्होंने मध्यप्रदेश के बासमती चावल के एतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए प्रदेश के किसानों एवं बासमती चावल आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये प्रदेश के बासमती चावल को जी.आई. दर्जा प्रदान करने का अनुरोध किया है।

मध्यप्रदेश के निर्यात होने वाले प्रसिद्ध बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने के राज्य के प्रयासों के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे इस संबंध में हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में दावा किया गया है कि ऐसा हो जाने पर पंजाब और अन्य राज्यों के हित प्रभावित होंगे, जिनके बासमती चावल को पहले से ही ‘जीआई टैग’ हासिल है। पत्र में यह भी कहा गया है कि ऐसा होने पर पाकिस्तान को भी लाभ मिल सकता है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि पंजाब और हरियाणा के बासमती निर्यातक मध्यप्रदेश से बासमती चावल खरीद रहे हैं। केंद्र सरकार के निर्यात के आकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। केंद्र सरकार वर्ष 1999 से मध्यप्रदेश को बासमती चावल के ब्रीडर बीज की आपूर्ति कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि तत्कालीन सिंधिया स्टेट के रिकॉर्ड में अंकित है कि वर्ष 1944 में प्रदेश के किसानों को बीज की आपूर्ति की गई थी। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ राइस रिसर्च, हैदराबाद ने अपनी उत्पादन उन्मुख सर्वेक्षण रिपोर्ट में दर्ज किया है कि मध्यप्रदेश में पिछले 25 वर्ष से बासमती चावल का उत्पादन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश को मिलने वाले जीआई टैगिंग से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारत के बासमती चावल की कीमतों को स्थिरता मिलेगी और देश के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया है कि मध्यप्रदेश के 13 जि़लों में वर्ष 1908 से बासमती चावल का उत्पादन हो रहा है और इसका लिखित इतिहास भी है। मध्यप्रदेश का बासमती चावल अत्यंत स्वादिष्ट माना जाता है और अपने जायके और खुशबू के लिए यह देश विदेश में प्रसिद्ध है।

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