राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान के किसानों को खाद की किल्लत से राहत, जल्द पहुँचेगी 8000 मीट्रिक टन डीएपी

15 जुलाई 2025, नई दिल्ली: राजस्थान के किसानों को खाद की किल्लत से राहत, जल्द पहुँचेगी 8000 मीट्रिक टन डीएपी – खरीफ 2025 सीजन की तैयारी को लेकर राजस्थान में खाद आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसके चलते कोटा जिले में कृषि विकास कार्यक्रमों और खाद आपूर्ति व्यवस्था को समयबद्ध व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टॉस्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने की, जिसमें कृषि विभाग, इफको, सीएफसीएल, कृषकों, नाबार्ड सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

उर्वरक आपूर्ति में पारदर्शिता और सहमति अनिवार्य

बैठक के दौरान कलक्टर पीयूष समारिया ने निर्देश दिए कि किसी भी कृषक की पूर्व सहमति के बिना उर्वरकों की अटैचमेंट न की जाए। ऐसा करने पर संबंधित संस्था के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्वरकों का वितरण केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं के माध्यम से ही किया जाए और इसकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

वैकल्पिक उर्वरकों को अपनाने पर दिया ज़ोर

कलक्टर ने डीएपी के स्थान पर एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट), एनपीके (नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटाश) एवं अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए किसानों को जागरूक करने हेतु विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। इससे उर्वरक संतुलन के साथ-साथ मृदा की सेहत भी बेहतर बनी रहेगी।

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सॉइल टेस्टिंग और बीमा योजनाओं पर विशेष बल

कलक्टर ने सॉइल टेस्टिंग की गतिविधियों को और बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों को उनकी भूमि की पोषण ज़रूरतों के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने हेतु प्रेरित किया जाए। साथ ही उन्होंने फसल बीमा, बीमा पाठशालाएं, गोष्ठियां व विकसित कृषि संकल्प अभियान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रचार-प्रसार बढ़ाया जाए ताकि अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सकें।

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उन्होंने यह भी कहा कि किसान यदि फसल में परिवर्तन करें तो उसकी सूचना देना सुनिश्चित करें ताकि बीमा क्लेम में किसी भी प्रकार की अड़चन न आए। आगामी बैठक में क्षेत्रवार बीमा क्लेम की समीक्षा प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए।

संयुक्त निदेशक कृषि ने दी जानकारी पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध

संयुक्त निदेशक कृषि अतिश कुमार शर्मा ने बैठक में बताया कि वर्तमान में जिले में उर्वरकों( यूरिया डीएपी एसएसपी एनपीके) की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने बताया कि आगामी 15 दिनों में डीएपी की 4 रैक प्रस्तावित हैं जिससे 7000 से 8000 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी जिले में पहुंचेगा। इसके अतिरिक्त अब तक 1 लाख 58 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है।

समय पर आपूर्ति एवं प्रचार-प्रसार के निर्देश

कलक्टर ने इफको, कृषकों, सीएफसीएल सहित सभी उर्वरक कंपनियों को निर्देशित किया कि समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करें एवं किसी भी स्तर पर किसानों को असुविधा न हो। साथ ही उन्होंने बीमा कंपनियों को निर्देशित किया कि बीमित किसानों की संख्या में वृद्धि हेतु विशेष जागरूकता अभियान चलाएं।

उन्होंने कहा कि वितरण प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए और कृषकों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

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