रायपुर: किसान देवा मांडवी ने धान छोड़ अपनाई मिलेट की खेती, इस खास तकनीक से हासिल की रिकॉर्ड पैदावार; जानिए कैसे
28 नवंबर 2025, रायपुर: रायपुर: किसान देवा मांडवी ने धान छोड़ अपनाई मिलेट की खेती, इस खास तकनीक से हासिल की रिकॉर्ड पैदावार; जानिए कैसे – पारंपरिक धान के साथ-साथ अब मिलेट फसलों जैसे रागी, कुल्थी, कोदो, मंडिया और कोसरा की वैज्ञानिक एवं नवाचार आधारित खेती तेजी से बढ़ रही है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा जिले के ग्राम पोटाली, पटेलपारा (विकासखंड कुआकोंडा) के किसान श्री देवा मांडवी “बड़ा कोसरा” की आधुनिक तकनीक से खेती कर जिले की कृषि प्रगति का प्रेरक चेहरा बन गए हैं।
जैविक उपचारों से फसल की गुणवत्ता में आया सुधार
मांडवी ने एसएमआई तकनीक अपनाकर बड़ा कोसरा की खेती में एक सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। निर्माण ऑर्गेनाइजेशन दंतेवाड़ा और कृषि विभाग ने उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने 15-21 दिन की नर्सरी तैयार कर 30-30 सेंटीमीटर की दूरी पर एकल पौध रोपाई की। नियमित साइकिल वीडिंग, जीवामृत और हांडी दवा जैसे जैविक उपचारों से फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आया। अगस्त में रोपी गई फसल आज प्रति पौधा 30-40 बालियों के साथ उत्कृष्ट स्थिति में खड़ी है।
बड़ा कोसरा की खेती हुआ बहुत लाभदायक साबित
पिछले वर्ष अरकू (आंध्र प्रदेश) में हुए प्रशिक्षण और फसल भ्रमण ने श्री मांडवी को आधुनिक खेती की नई समझ दी, जिसे उन्होंने अपने खेत में सफलतापूर्वक लागू किया। आज उनका खेत “मॉडल फार्म” के रूप में पहचाना जा रहा है। इस प्रक्रिया में निर्माण संस्था, कृषि विभाग और जिला प्रशासन का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। मांडवी बताते हैं कि एसएमआई तकनीक से बड़ा कोसरा की खेती करने का निर्णय मेरे लिए बहुत लाभदायक साबित हुआ। तकनीकी सहायता ने मुझे नई दिशा दी है। मैं चाहता हूँ कि हमारे क्षेत्र के अन्य किसान भी इस विधि को अपनाएं, ताकि उनकी खेती अधिक मजबूत और लाभदायक बन सके।
कोसरा की सफल रोपाई से किसानों की आय में हो रही है वृद्धि
जिले के कई अन्य क्षेत्रों जैसे छिंदनार, बुधपदर, पालनार, भटपाल, गुटोली, गुमलनार, बड़े गुडरा, मोखपाल, बड़े तुमनार, छोटे तुमनार, बुरगुम, अचेली, बालूद, गंजेनार, पाहुरनार आदि ग्रामों में भी एसएमआई विधि से कोसरा की सफल रोपाई जारी है। भूमगादी समिति द्वारा किसानों को कोसरा चोप उपलब्ध कराया जा रहा है। निर्माण संस्था के फील्ड ऑफिसर श्री सुरेश कुमार नाग और स्थानीय संसाधन व्यक्ति निरंतर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में यह फसल तेजी से फैल रही है और बेहतर उत्पादन के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग मिलकर किसानों की आय और क्षेत्र की कृषि उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
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