बड़वानी जिले में केले की खेती के लिए पोस्ट हार्वेस्ट सुविधाओं का होगा विस्तार
13 जनवरी 2026, बड़वानी: बड़वानी जिले में केले की खेती के लिए पोस्ट हार्वेस्ट सुविधाओं का होगा विस्तार – बड़वानी जिले में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा केले की खेती और उसके मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में केले की खेती के लिए पोस्ट हार्वेस्ट सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
वर्तमान में जिले में केले का कुल रकबा 3655 हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जिसकी खेती मुख्य रूप से बड़वानी, ठीकरी, राजपुर और पानसेमल विकासखंडों में की जा रही है। पोस्ट हार्वेस्ट सुविधाओं का विस्तार जिले की 5 तहसीलो के कुल 62 ग्रामों – पानसेमल तहसील के ग्राम टेमली, मोरतलाई, जाहूर, निसरपुर, बडगांव, आमदा, मलफा, ओसाड़ा, मेलन, चिखल्दा, भातकी, बड़वानी तहसील के ग्राम एकलरा, गजनेरा, कसरावद, छोटी कसरावद, कल्याणपुरा, पिपलाज, करी, खेड़ी, पिपलूद, तलुन, बालकुआ, लोनसरा, तलवाड़ाबुजुर्ग, बोरलाय, सेगांव, उटावद, अंजड़ तहसील के ग्राम दतवाड़ा, छोटा बड़दा, पलासिया, बिल्वरोड़, चकेरी, मोहीपुरा, मण्डवाड़ा, लोहारा, बावड़िया, ठीकरी तहसील के ग्राम चिचली, विश्वनाथखेड़ा, दवाना, कुआ, केरवा, घटवा, अभाली, सेगवाल, जरवाह, बिल्वाडेब, पाडला, रणगांव डेब, बलगांव, सेमल्दा डेब, पिपली डेब, हतोला, लखनगांव, देवला, उचावद, राजपुर तहसील के ग्राम ऊँची , सालखेड़ा, साली, भागसुर, कासेल, छोटी खरगोन, नागलवाड़ी में केले का बड़े स्तर पर उत्पादन हो रहा है।
इन क्षेत्रों के किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रशासन द्वारा पेकिंग हाउस का निर्माण किया जायेगा साथ ही प्री-कूलिंग चेम्बर और प्रसंस्करण इकाइयों का निर्माण हेतु प्रयास किये जा रहे है। ये सुविधाएं उत्पादक ग्रामों की सुविधाजनक पहुंच को ध्यान में रखकर स्थापित की जायेगी । जिले में वर्तमान में 4 राइपनिंग चेम्बर राजलक्ष्मी केला राइपनिंग चेम्बर, बरूफाटक APEDA, PLB फ्रूट राइपनिंग चेम्बर बड़वानी जिले में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। योजनाओं के माध्यम से मिल रहा आर्थिक लाभ केला प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के इच्छुक कृषकों और उद्यमियों को शासन की दो प्रमुख योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है । 1. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएम -एफएमई ) इसके तहत योजना लागत पर 35 प्रतिशत का अनुदान देय है। 2. एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड ( एआईएफ ) इसके माध्यम से परियोजना ऋण पर ब्याज अनुदान का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
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