प्राकृतिक खेती से छिंदवाड़ा की पूजा कमा रही लाखों का मुनाफा
09 मार्च 2026, छिन्दवाड़ा: प्राकृतिक खेती से छिंदवाड़ा की पूजा कमा रही लाखों का मुनाफा – मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के ग्राम रोहनाकला की प्रगतिशील महिला किसान पूजा माहौरे आज प्राकृतिक खेती के माध्यम से न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। पति तरुण माहौरे के साथ मिलकर उन्होंने खेती को एक नए स्वरूप में विकसित किया है।
पूजा माहौरे के पास लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि है। पहले वे परंपरागत तरीके से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर खेती करती थीं। समय के साथ खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही थी और रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति कम होने लगी थी। मिट्टी कठोर होती जा रही थी और स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इस चिंता ने उन्हें खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में प्रेरित किया।
प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ाया कदम – कुछ माह पहले उन्हें कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अंतर्गत कृषि सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्हें नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती के विभिन्न अवयवों और तकनीकों को सीखा। उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, पंचगव्य, निर्मास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक घोल बनाना सीखा और अपने खेत में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से इन्हें तैयार कर उपयोग करना शुरू किया। आज वे अपने 1 एकड़ क्षेत्र में सब्जियों की प्राकृतिक खेती कर रही हैं और पूरी तरह रसायन मुक्त सब्जियां उत्पादन कर रही हैं।
हाट बाजार और देसी गाय पालन से बढ़ी आय – प्राकृतिक खेती से उत्पादित सब्जियों की मांग बाजार में अधिक होने लगी। पूजा माहौरे अपनी सब्जियों को प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में बेचती हैं, जहां उन्हें अच्छे दाम मिलते हैं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि खेती से हर सप्ताह नियमित आय होगी, लेकिन प्राकृतिक खेती के कारण उनकी आमदनी पहले से दो गुना से भी अधिक हो गई है। आत्मा परियोजना के प्रशिक्षण से प्रेरित होकर उन्होंने देसी गिर और साहीवाल नस्ल की कुल 10 गायों का पालन शुरू किया। इन गायों का दूध शहर में बेचकर भी वे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
मासिक आय – प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में सब्जियों की बिक्री से उन्हें लगभग ₹10,000 प्रतिमाह शुद्ध लाभ और देसी गाय के दूध की बिक्री से लगभग ₹30,000 प्रतिमाह शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार पूजा माहौरे प्राकृतिक खेती और पशुपालन के माध्यम से लगभग ₹40,000 प्रतिमाह की अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं।
विशेष उपलब्धि – महिला किसान पूजा माहौरे के इस नवाचार और मेहनत की सराहना कृषि विभाग, आत्मा परियोजना और पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा की जा रही है। हाल ही में कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय मिलेट मेले में उन्होंने प्राकृतिक और जैविक सब्जियों की दुकान लगाई, जहां उन्हें अच्छा मुनाफा मिला। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें संयुक्त संचालक कृषि एवं जिले के उप संचालक कृषि द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
अन्य किसानों के लिए बनी प्रेरणा – पूजा माहौरे की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान प्राकृतिक खेती और पशुपालन को अपनाएं तो कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। आज वे अपने क्षेत्र के अन्य किसानों और महिलाओं को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। कृषक कल्याण वर्ष 2026 और महिला दिवस के अवसर पर पूजा माहौरे जैसी कृषि सखियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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