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राज्य कृषि समाचार (State News)

पशु-सखियाँ होंगी ए-हेल्प के रूप में प्रशिक्षित

23 जुलाई 2022, इंदौर । पशु-सखियाँ होंगी ए-हेल्प के रूप में प्रशिक्षित –  ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उन्नत बनाने के लिये राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों की पशु-सखी के रूप में कार्य करने वाली महिला सदस्यों को ए-हेल्प के रूप में प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा देश का पहला प्रशिक्षण प्रशासन अकादमी भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में प्रारंभ किया गया है।

 ए-हेल्प -संयोजक कड़ी –   ए-हेल्प अपने क्षेत्र की विस्तार कार्यकर्ता होंगी। वह पशुपालकों के सम्पर्क में रहेगी और पशुपालन विभाग एवं पशुपालकों के बीच संयोजक कड़ी होगी, जिन्हें लगातार अपने कार्य के लिये प्रशिक्षण दिया जायेगा। योजना से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूह की महिला सदस्य को विभिन्न योजनाओं में भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। वह अपने आस-पास के क्षेत्रों में पशुपालकों को शासन की सभी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करायेगी। सामान्यतः: एक गाँव में एक ए-हेल्प होगी। ए-हेल्प, पशु चिकित्सकों को स्थानीय विभागीय कार्यों में सहयोग करने के साथ अपने क्षेत्र के पशुपालकों के सम्पर्क में रहेगी। वह क्षेत्र के समस्त पशुधन और कुक्कुट संख्या का रिकॉर्ड ब्लॉक स्तर के पशु चिकित्सकों के साथ साझा करेगी। इससे पशुपालन गतिविधियों का क्रियान्वयन आसान हो जायेगा और दुग्ध उत्पादन आदि पर सीधा असर पड़ेगा। ए-हेल्प पशुपालकों को कान की टेगिंग के लिये चिन्हित कर अवगत करायेगी और टेगिंग का डाटा इनाफ पोर्टल पर दर्ज कराना सुनिश्चित करेगी। वे अपने क्षेत्र के पशुपालकों को पशुओं के रख-रखाव, टीकाकरण, विभिन्न विभागीय योजनाओं के लाभ के बारे में बतायेंगी।ए-हेल्प पशुपालकों को पशुधन बीमा करवाने और लाभ दिलाने में भी मदद करेगी। इन्हें संतुलित राशन बनाना भी सिखाया जायेगा। वे चारा उत्पादन के लिये भी प्रोत्साहित करेंगी। सभी ए-हेल्प को फर्स्ट-एड किट भी दी जायेगी।

ए-हेल्प की महत्वपूर्ण भूमिका –   ए-हेल्प की भूमिका राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में एफएमडी एवं ब्रुसेला टीकाकरण, पीपीआर उन्मूलन, क्लॉसिक स्वाइन फीवर नियंत्रण और राष्ट्रीय गोकुल मिशन में कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम में महत्वपूर्ण होगी। इसी प्रकार डेयरी गतिविधियों का प्रसार एवं क्रियान्वयन, गौ-भैंस वंशीय पशुओं को कान में टैग लगाना, किसान उत्पादक संगठनों को पशुपालन में उद्यमिता विकास के लिये प्रोत्साहित करने, विभिन्न विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग और निचले स्तर तक पशुपालकों को जानकारी उपलब्ध कराने में ए-हेल्प की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

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