राज्य कृषि समाचार (State News)

पांढुर्ना: महिला कृषक रामरेखा बनी गांव के लिए प्रेरणा स्रोत

09 मार्च 2026, (उमेश खोड़े, कृषक जगत, पांढुर्ना)पांढुर्ना: महिला कृषक रामरेखा बनी गांव के लिए प्रेरणा स्रोत – जिले के विकासखंड सौसर के ग्राम बारादेवी खापा की निवासी महिला कृषक श्रीमती रामरेखा पाटील आज अपने क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के माध्यम से सफलता की नई मिसाल बन गई हैं। सामान्य महिला कृषक से महिला उद्यमी बनने तक का उनका सफर गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है।  श्रीमती पाटील के पास कुल 1.348 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें से लगभग 0.800 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है। वे वर्तमान में अपने खेत में कपास, तुवर, बरबटी, ग्वार फली, भिंडी, बैंगन और गेहूँ जैसी फसलों की प्राकृतिक विधि से खेती कर रही हैं।

श्रीमती रामरेखा पाटील के परिवार में कृषि के साथ पशुपालन भी आय का प्रमुख स्रोत है। उनके पास 04 देशी पशु, जिनमें 02 साहीवाल गाय और 02 बैल शामिल हैं। इन पशुओं से प्राप्त गोबर और गोमूत्र का उपयोग वे प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत, घन जीवामृत, दशपर्णी अर्क और नीमास्त्र जैसे जैविक घोल तैयार करने में करती हैं। इससे खेती की लागत में कमी आई है और रसायन मुक्त शुद्ध अन्न का उत्पादन संभव हो रहा है। खेती के साथ-साथ पशुपालन से भी उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है। दूध उत्पादन से लगभग 80 हजार रुपये तथा सब्जी उत्पादन एवं अन्य फसलों से लगभग 1.50 लाख रुपये की वार्षिक आय हो रही है। इस प्रकार उनकी कुल वार्षिक आय लगभग 2.30 लाख रुपये हो गई है। प्राकृतिक खेती अपनाने से उत्पादन लागत कम हुई है और लाभ में वृद्धि हुई है, जिससे उनका आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है।

श्रीमती पाटील ने कृषि विभाग के आत्मा परियोजना के माध्यम से प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और वर्तमान में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) के अंतर्गत कृषि सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी अर्क, घनजीवामृत और नीमास्त्र बनाने की विधि एवं उनके उपयोग की जानकारी प्राप्त हुई। इसके साथ ही कीट नियंत्रण के लिए येलो स्टिकी ट्रैप जैसे उपायों का उपयोग भी वे अपने खेत में करती हैं। श्रीमती रामरेखा पाटील का मानना है कि प्राकृतिक खेती अपनाकर न केवल खेती की लागत कम की जा सकती है, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण की स्थिति में भी सुधार किया जा सकता है। वे बताती हैं कि देशी गाय पालन का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक घोल तैयार करना है, जिससे रसायन मुक्त शुद्ध अन्न का उत्पादन किया जा सके। आज वे अपने गांव में अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके मार्गदर्शन से कई किसान प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं। अपनी मेहनत, नवाचार और जागरूकता के माध्यम से श्रीमती रामरेखा पाटील गांव की महिलाओं और किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई हैं।

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