राज्य कृषि समाचार (State News)

MP के इस गांव में प्राकृतिक खेती का कमाल, ₹4 हजार की लागत घटकर हुई ₹1,500; 30 परिवारों ने अपनाया तरीका

19 अगस्त 2026, भोपाल: MP के इस गांव में प्राकृतिक खेती का कमाल, ₹4 हजार की लागत घटकर हुई ₹1,500; 30 परिवारों ने अपनाया तरीका – मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के कौआसरई गांव में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए कम लागत में खेती और आय बढ़ाने का माध्यम बन रही है। गांव के 30 परिवार प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं, जिनमें महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी है। रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने के साथ किसान वर्मी कम्पोस्ट, एजोला, हरी खाद और जीवामृत जैसे जैविक संसाधन खुद तैयार कर रहे हैं।

₹4 हजार से घटकर ₹1,500 हुई एक एकड़ की लागत

कौआसरई गांव की सीआरपी महिलाएं आरती सिंह और रानू यादव ने बताया कि पहले रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में एक एकड़ में करीब 3 बोरी यूरिया और 2 बोरी डीएपी पर लगभग ₹4 हजार खर्च हो जाते थे। अब किसान घर पर ही वर्मी कम्पोस्ट, एजोला, हरी खाद और जीवामृत तैयार कर लेते हैं। इससे एक एकड़ की खेती की लागत करीब ₹1,500 रह गई है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक खेती शुरू करने के पहले वर्ष उत्पादन में कुछ कमी आई, लेकिन इसकी भरपाई जैविक अनाज के मूल्य संवर्धन और बेहतर कीमत से हो जाती है।

चना, कुटकी से लेकर गेहूं-धान और सब्जियों तक उत्पादन

प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान चना, कुटकी, अलसी, मटर, गेहूं, धान और विभिन्न सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। किसानों के मुताबिक प्राकृतिक तरीके से तैयार इन उत्पादों को बाजार में अपेक्षाकृत बेहतर कीमत मिल रही है। प्राकृतिक खेती से कौआसरई के अलावा आसपास के गांवों की करीब 300 किसान महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं। किसानों का कहना है कि इससे जमीन की उर्वरता बनाए रखने, बीमारियों को कम करने और सिंचाई में पानी की जरूरत घटाने में भी मदद मिल रही है।

किसान खुद तैयार कर रहे जैविक संसाधन

किसान खेती के लिए जरूरी जैविक संसाधनों को स्थानीय स्तर पर खुद तैयार कर रहे हैं। वर्मी कम्पोस्ट, एजोला और हरी खाद तैयार कर खेतों में इस्तेमाल की जा रही है। इससे बाहर से कृषि आदान खरीदने पर होने वाला खर्च कम हो रहा है और खेत की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल रही है।

कृषि विभाग और NGO दे रहे तकनीकी मार्गदर्शन

प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को कृषि विभाग और प्रधान एनजीओ की ओर से तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न विधियों, जैविक खाद तैयार करने और खेतों में उसके इस्तेमाल की तकनीक की जानकारी दी जा रही है। विभागीय अमले और संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को जरूरी सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग पर जोर

कौआसरई गांव में विधायक शरद कोल, कलेक्टर पार्थ जायसवाल, पुलिस अधीक्षक संजय कुमार अग्रवाल और सीईओ जिला पंचायत शिवम प्रजापति ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी महिलाओं और किसानों से चर्चा की। इस दौरान प्राकृतिक खेती, उत्पादों की बिक्री, बीज की उपलब्धता और तकनीकी जानकारी से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई। कलेक्टर ने किसानों को अपने जैविक उत्पाद सीधे बाजार में बेचने और ब्रांडिंग के जरिए उनकी पहचान एवं मूल्य बढ़ाने के लिए एफपीओ बनाकर काम करने की समझाइश दी।

किसानों को ₹4 हजार प्रति एकड़ अनुदान

उप संचालक कृषि केएस यादव ने बताया कि शासन की ओर से प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को ₹4 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान भी दिया गया है। इसके अलावा बीआरसी को आवश्यक संयंत्रों की खरीद के लिए जल्द ही ₹1 लाख का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इस तरह कौआसरई गांव में किसान प्राकृतिक खेती के जरिए रासायनिक आदानों पर खर्च कम करने के साथ जैविक उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार से अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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