प्राकृतिक खेती-कम लागत में अधिक मुनाफा : श्री शिवराज सिंह

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प्रदेश के 5200 गांव में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन

  • (विशेष प्रतिनिधि)

11 जुलाई 2022, भोपाल । प्राकृतिक खेती-कम लागत में अधिक मुनाफा : श्री शिवराज सिंह म.प्र. में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रति सजग एवं सचेत प्रदेश के किसान पुत्र एवं यशस्वी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान निरंतर प्रयासरत् हैं। उन्होंने गुजरात के राज्यपाल आचार्य श्री देवव्रत से प्राकृतिक खेती के विचार सुनने के पश्चात कई कृषक हितैषी कदम उठाए हैं जिससे राज्य के किसान इस खेती के प्रति आकर्षित हो सकें तथा इसे अपनाएं।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्राकृतिक खेती धरती, पर्यावरण और मानव जीवन को बचाने का अभियान है। यह केमिस्ट्री लेब से निकलकर प्रकृति लेब में ले जाने वाली खेती है। प्राकृतिक खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली केमिकल रहित खेती है। रसायनिक खाद और कीटनाशक के अत्यधिक उपयोग से धरती का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है। किसानों के केंचुए जैसे उपयोगी कीट मित्र समाप्त होते जा रहे हैं। धरती की उर्वराशक्ति क्षीण हो गई है। रसायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले गेहूं, धान, अनाज, फल, सब्जी आदि मनुष्यों में गंभीर रोग विकसित कर रहे हैं।

धरती की उर्वरा क्षमता बनाए रखना होगा 

श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश जैविक खेती में अग्रणी है। रसायनिक खाद और कीटनाशक के उपयोग के परिणामस्वरूप धरती का स्वास्थ्य निरंतर प्रभावित हो रहा है। आने वाली पीढिय़ों के लिए धरती माँ की उर्वरा क्षमता को बनाए रखने के लिए हमें सचेत रहना होगा। उन्होंने कहा कि यह धरती केवल मनुष्यों के लिए नहीं, अपितु कीट-पतंगों और जीव-जंतुओं के लिए भी है। हमने कीटनाशक के अंधाधुंध उपयोग से कीट मित्रों को समाप्त कर दिया है

प्राकृतिक खेती ही है वैकल्पिक मार्ग

श्री चौहान ने कहा कि यह वास्तविकता है कि उत्पादन बढ़ाने के लिए रसायनिक खाद की आवश्यकता थी, उत्पादन बढ़ाना जरूरी था। परंतु समय के साथ इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। रसायनिक खाद एवं कीटनाशक के अधिक उपयोग और खेती में पानी की अधिक आवश्यकता आदि से खेती की लागत बढ़ती जा रही है। उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन खर्च भी निरंतर बढ़ता जा रहा है। खेती के इस दुष्चक्र का वैकल्पिक मार्ग खोजना होगा। धरती के स्वास्थ्य, कृषकों की स्थिति और निरोगी जीवन के लिए प्राकृतिक खेती ही वैकल्पिक मार्ग है।

देसी गाय रखने पर मिलेंगे 900 रु. प्रति माह

श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में 52 जिले हैं। प्रारंभिक रूप से प्रत्येक जिले के 100 गाँव में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी। प्रदेश के 5,200 गांव में प्राकृतिक खेती की गतिविधियाँ आरंभ होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय आवश्यक है। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को देसी गाय रखने के लिए 900 रुपये प्रति माह अर्थात् 10 हजार 800 रूपए प्रतिवर्ष उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही प्राकृतिक कृषि किट लेने के लिए किसानों को 75 प्रतिशत राशि सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी। प्राकृतिक खेती के मार्गदर्शन के लिए प्रत्येक विकासखंड में 5 पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती की अवधारणा को व्यवहार में लाने के लिए वे स्वयं 5 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती प्रारंभ करेंगे।
प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड में शीर्ष निकाय – टास्कफोर्स

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए म.प्र. प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड में शीर्ष निकाय तथा टास्कफोर्स का गठन किया गया है।

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