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राज्य कृषि समाचार (State News)

नरसिंहपुर: सोयाबीन में रोग-कीट से बचाव के लिए किसान अपनाएं IPM, सप्ताह में 2-3 बार खेत निरीक्षण की सलाह  

23 सितंबर 2026, नरसिंहपुर: नरसिंहपुर: सोयाबीन में रोग-कीट से बचाव के लिए किसान अपनाएं IPM, सप्ताह में 2-3 बार खेत निरीक्षण की सलाह – मध्यप्रदेश में वर्तमान मौसम को देखते हुए सोयाबीन फसल में विभिन्न रोग एवं कीटों के प्रकोप की संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, नरसिंहपुर ने किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने और रोग-कीटों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। किसानों को विशेष रूप से पीला मोजेक रोग, सफेद मक्खी, गर्डल बीटल, तना मक्खी, सेमीलूपर, तंबाकू की इल्ली और फली छेदक की निगरानी करने को कहा गया है।

पीला मोजेक के लक्षण दिखें तो संक्रमित पौधे हटाएं

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विशाल मेश्राम ने बताया कि सोयाबीन में पीला मोजेक विषाणुजनित रोग है। इसकी पहचान पत्तियों पर पीले एवं हरे रंग के चितकबरे धब्बों से की जा सकती है। रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर संक्रमित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर खेत से बाहर निकालने और उचित तरीके से नष्ट करने की सलाह दी गई है।

साथ ही रोग के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सफेद मक्खी की भी नियमित निगरानी करने को कहा गया है। सफेद मक्खी की निगरानी के लिए प्रति एकड़ करीब 20 पीले चिपचिपे ट्रैप खेत में उचित ऊंचाई पर लगाए जा सकते हैं। ट्रैप पर सफेद मक्खियों की संख्या बढ़ने या कीटों का अधिक प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

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इन कीटों पर भी रखें नजर

किसानों को गर्डल बीटल और तना मक्खी के लिए पौधों और तनों का नियमित निरीक्षण करने को कहा गया है। वहीं पत्ती खाने वाली इल्लियों की निगरानी के लिए पत्तियों की ऊपरी और निचली सतह की जांच करने की सलाह दी गई है। फूल एवं फली बनने की अवस्था में फली छेदक इल्लियों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।

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सप्ताह में 2-3 बार करें खेत का निरीक्षण

कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से सप्ताह में कम से कम 2-3 बार खेत का निरीक्षण करने का आग्रह किया है, ताकि रोग और कीटों की समस्या को प्रारंभिक अवस्था में पहचाना जा सके। केंद्र ने केवल रासायनिक नियंत्रण पर निर्भर रहने के बजाय समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाने की सलाह दी है। IPM में नियमित निगरानी, पीले चिपचिपे ट्रैप का उपयोग, संक्रमित पौधों को हटाना, यांत्रिक एवं जैविक उपाय तथा आवश्यकता होने पर अनुशंसित कीटनाशकों का संतुलित उपयोग शामिल है।

बिना पहचान के न करें कीटनाशक का प्रयोग

किसानों को सलाह दी गई है कि बिना कीट की पहचान किए अनावश्यक कीटनाशक का प्रयोग न करें। दवा की मात्रा और उपयोग संबंधी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। कीटनाशकों का छिड़काव करते समय दस्ताने, मास्क और अन्य आवश्यक सुरक्षा साधनों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। किसी भी रोग या कीट की समस्या दिखाई देने पर किसान फोटो अथवा नमूना लेकर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से आवश्यक सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

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