नाबार्ड ने किया म.प्र. के लिए 2.43 लाख करोड़ की ऋण संभाव्यता का आकलन

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30 नवंबर 2021, भोपाल । नाबार्ड ने किया म.प्र. के लिए 2.43 लाख करोड़ की ऋण संभाव्यता का आकलन – नाबार्ड ने मध्य प्रदेश राज्य में वर्ष 2022-23 हेतु बैंकों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत रु.2,42,967 करोड़ का ऋण संभाव्यता का आंकलन किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 11 प्रतिशत अधिक है। श्रीमती टी एस राजी गैन, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने ‘राज्य ऋण संगोष्ठी’ के दौरान यह जानकारी दी। नाबार्ड द्वारा आयोजित संगोष्ठी में श्री जगदीश देवड़ा, वित्त मंत्री, मध्य प्रदेश शासन, श्री उमेश कुमार पाण्डेय, मुख्य महाप्रबंधक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, श्री एस. डी. महुरकर, फील्ड महाप्रबंधक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और एसएलबीसी संयोजक, श्री शैलेन्द्र सिंह कृषि उत्पादन आयुक्त, श्री जे. एन. कंसोटिया अपर मुख्य सचिव पशुपालन विभाग, श्री मनोज गोविल प्रमुख सचिव वित्त , श्री भाष्कर लक्षकार आयुक्त, संस्थागत वित्त संचनालय, मध्य प्रदेश शासन, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं तथा प्रसाशक अपैक्स बैंक श्री नरेश पाल कुमार, प्रबंध संचालक अपैक्स बैंक श्री पी.एस. तिवारी तथा प्रदेश के प्रमुख बैंक अधिकारी उपस्थित थे। संगोष्ठी में वर्ष 2022-23 के लिए रु.2,42,967 करोड़ के ऋण आंकलन वाले स्टेट फोकस पेपर का विमोचन किया गया।

वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने इस अवसर पर कहा कि नाबार्ड भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण संस्था है जो प्रतिवर्ष राज्य में बैंकों के माध्यम से बाँटे जाने वाले ऋण का आंकलन करती है। नाबार्ड का यह प्रयास सराहनीय है। बैंक अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके सकारात्मक सहयोग के बगैर आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति संभव नहीं है। उन्होने बैंकों से कहा कि नाबार्ड द्वारा आंकलित स्टेट फोकस पेपर के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में बैंक कम से कम रु. 2,42,967 करोड़ का ऋण वितरित करें जिससे किसान, महिला, बेरोजगार युवक व युवतियाँ और उद्यमियों को विकास की मुख्य धारा में जोड़ा जा सके और प्रदेश के ग्रामीण और कृषि क्षेत्र का विकास किया जा सके।

श्रीमती टी एस राजी गैन मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने बताया कि वर्ष 2022-23 के लिए रु.2,42,967 करोड़ के कुल ऋण अनुमान में से, लगभग 74त्न कृषि के तहत है, जिसमें फसली ऋण पर रु.1,18,288 करोड़ और कृषि सावधि ऋण पर रु.62,693 करोड़ देने का अनुमान है। जबकि एमएसएमई के तहत रु.39,267 करोड़ एवं अन्य प्राथमिकता क्षेत्र पर रु.22,715 करोड़ ऋण देने का अनुमान है। उन्होने वर्ष 2023 तक आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश बनाने के लिए प्रदेश के 100त्न किसानों तक केसीसी कवरेज बढ़ाने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश और कृषि उत्पादक समूहों के वित्तपोषण पर प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होने कहा कि आने वाले वर्ष में प्रदेश के 13 जिलों में कृषि उत्पादों के मूल्य सवर्धन के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होने नाबार्ड द्वारा राज्य में चलाई जा रहीं ग्रामीण भंडारण, 10000 एफपीओ, वाडी, वाटरशेड, वित्तीय समावेशन, सहकारी बैंकों को मदद, स्वयं सहायता समूह के सदस्यों तथा ग्रामीण युवाओं का कौशल उन्नयन , आरआईडीएफ के अंतर्गत राज्य सरकार को रु. 4000 करोड़ की सहायता तथा बैंकों को रु. 15,000 करोड़ से अधिक की पुनर्वित्त सहायता आदि विषयों एवं योजनाओं पर प्रकाश डाला।

श्री एस डी महुरकर, फील्ड महाप्रबंधक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और एसएलबीसी संयोजक ने नाबार्ड द्वारा एक ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर पर एक व्यापक दस्तावेज तैयार किए जाने के प्रयासों की सराहना की, जो प्रदेश की प्रगति के लिए ऋण लक्ष्य तय करने में सहायक होगा। उन्होने सभी बैंक प्रतिनिधियों की ओर से आश्वस्त किया कि इस लक्ष्य को पाने के लिए सभी बैंक मिलकर प्रयास करेंगे।

प्रदेश में स्वयं सहायता समूह, वित्तीय साक्षरता, किसान उत्पादक समूहों के संवर्धन आदि में उत्कृष्ट कार्य के लिए बैंकों को पुरस्कृत किया गया, साथ ही इस अवसर पर ‘प्याज भंडारण’ पर बैंकेबल मॉडल योजना की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। संगोष्टी में बैंक अधिकारीयों ने अपने अनुभव तथा सुझाव भी व्यक्त किये।

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