राज्य कृषि समाचार (State News)

दिल्ली की मंडियों में बेचा जाएगा एमपी का टमाटर, जानिए क्या है कारण

21 फ़रवरी 2025, भोपाल: दिल्ली की मंडियों में बेचा जाएगा एमपी का टमाटर, जानिए क्या है कारण – वैसे तो मध्यप्रदेश में उत्पादित टमाटर की खपत प्रदेश में ही हो जाती है लेकिन अब राज्य में उत्पादित टमाटरों को दिल्ली की मंडियों में बेचा जाएगा। इसके पीछे कारण यह है कि टमाटर के भाव बहुत गिर गए है और ऐसे में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) ने न केवल 62 हजार किलोग्राम से अधिक टमाटर को खरीदा है वहीं इन टमाटरों को दिल्ली की मंडियों में भी बेचा जाएगा। संस्थान ने ये टमाटर मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत खरीदा है।

फरवरी 2025 के मध्य तक, भारत के कुछ हिस्सों में, खासकर झारखंड जैसे राज्यों में टमाटर की कीमतों में नाटकीय रूप से गिरावट आई है। झारखंड में थोक कीमतें  2-3 प्रति किलोग्राम तक गिर गई हैं, कुछ खरीदार 1 प्रति किलोग्राम भी देने को तैयार नहीं हैं। हाल ही में टमाटर की गिरती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कहा था कि वह कोऑपरेटिव एनसीसीएफ के माध्यम से मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत मध्य प्रदेश में टमाटर के स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन की प्रतिपूर्ति करेगा। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राज्य में टमाटर के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम  के ट्रांसपोर्टेशन कंपोनेंट को एनसीसीएफ के माध्यम से लागू करने की मंजूरी दे दी है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया था, एनसीसीएफ जल्द ही मध्य प्रदेश से ट्रांसपोर्टेशन ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। दरअसल, इस स्कीम के अंतर्गत जहां उत्पादक और उपभोक्ता राज्यों के बीच शीर्ष फसलों (टमाटर, प्याज और आलू) की कीमत में अंतर है। वहां उत्पादक राज्य से अन्य उपभोक्ता राज्यों तक फसलों के स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन में होने वाले ऑपरेशनल कॉस्ट की प्रतिपूर्ति नाफेड और एनसीसीएफ जैसी सेंट्रल नोडल एजेंसियों को की जाएगी।  सरकार ने अपने बयान में कहा था कि ऐसा उत्पादक राज्यों के किसानों के हित में किया गया है। टमाटर के रेट में गिरावट साल 2025 की शुरुआत से देखी जा रही है। ये गिरावट रबी सीजन (दिसंबर-फरवरी में कटाई) से बम्पर फसल और परिवहन की परेशानियों के कारण हो रही है।

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