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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्य प्रदेश में मूंग की MSP पर खरीद 5.33 लाख टन के पार, किसानों को समय पर भुगतान पर जोर

08 सितंबर 2026, भोपाल: मध्य प्रदेश में मूंग की MSP पर खरीद 5.33 लाख टन के पार, किसानों को समय पर भुगतान पर जोर –  मध्य प्रदेश में इस सीजन मूंग की सरकारी खरीद ने रफ्तार पकड़ी है। राज्य में समर्थन मूल्य (MSP) पर अब तक 5.33 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद हो चुकी है, जबकि सरकार ने कुल 5.39 लाख मीट्रिक टन खरीद को मंजूरी दे रखी है।

शुरुआत में 4.55 लाख मीट्रिक टन खरीद की सीमा तय की गई थी, जिसे बाद में 84 हजार मीट्रिक टन और बढ़ाकर 5.39 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया। यह बढ़ोतरी इसलिए की गई ताकि पंजीकृत और इच्छुक किसानों की उपलब्ध पूरी मूंग समर्थन मूल्य पर खरीदी जा सके।

कौन कर रहा खरीद और कितना है भाव

राज्य में मूंग की खरीद केंद्रीय एजेंसियों NAFED और NCCF के जरिए हो रही है। खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए मूंग का समर्थन मूल्य 8,780 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जो पिछले सीजन से 13 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा है।

खरीद केंद्रों पर किसानों को पहले पंजीयन कराना होता है, इसके बाद स्लॉट बुकिंग के जरिए उन्हें उपज लेकर आने की तारीख दी जाती है। सत्यापन के बाद मूंग तौल की जाती है और भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है।

पंजीयन के समय किसान को अपनी खतौनी, आधार से जुड़ा बैंक खाता और बुवाई का रकबा दर्ज कराना होता है, ताकि तौल के वक्त मात्रा का मिलान आसानी से हो सके। जिन किसानों का पंजीयन रकबा कम और वास्तविक उपज ज्यादा निकलती है, उनकी उपज सत्यापन के बाद अतिरिक्त मात्रा के तौर पर अलग से दर्ज की जाती है।

भुगतान और फसल बीमा पर क्या बदलाव

सरकार ने PM-AASHA योजना के तहत किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर खास जोर दिया है, ताकि उपज बेचने के कुछ दिनों के भीतर ही पैसा किसान के खाते में पहुंच जाए। इसके साथ ही फसल बीमा को लेकर भी बदलाव पर चर्चा चल रही है।

अधिकारियों के मुताबिक पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) को व्यापक रूप से लागू करने और मौसम-सूचना नेटवर्क डेटा प्रणाली (WINDS) के क्रियान्वयन पर काम चल रहा है। साथ ही फसल नुकसान का सही आकलन करने के लिए क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट फिर से बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे बीमा दावों का निपटारा ज्यादा सटीक तरीके से हो सके।

कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस साल मालवा और बुंदेलखंड के जिलों में मूंग की खरीद केंद्रों पर सबसे ज्यादा भीड़ देखी गई, क्योंकि कई किसानों ने धान-सोयाबीन के साथ-साथ कम अवधि की मूंग की फसल भी ली थी। खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने और तौल मशीनों की जांच कराने के निर्देश भी जिला प्रशासन को दिए गए हैं, ताकि किसानों को घंटों इंतजार न करना पड़े।

यह खबर मूंग उगाने वाले किसानों के लिए राहत की है, क्योंकि खुले बाजार में भाव कई बार MSP से नीचे चला जाता है और सरकारी खरीद ही उन्हें उचित दाम की गारंटी देती है। जिन किसानों ने अब तक अपनी उपज नहीं बेची है, उनके लिए यह जानकारी काम की है कि खरीद की सीमा बढ़ाई जा चुकी है और पंजीयन कराने वाले सभी किसानों की उपज लेने की कोशिश हो रही है। कृषि-इनपुट कारोबार और मंडी व्यापारियों के लिए भी यह संकेत है कि समय पर भुगतान मिलने से किसानों के हाथ में नकदी आएगी, जो अगली फसल के लिए बीज, खाद और कीटनाशक खरीदने में इस्तेमाल हो सकती है।

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