राज्य कृषि समाचार (State News)

मूंग की फसल पर पीला मोजेक से लेकर जड़ सड़न तक कई रोगों का खतरा, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी  

22 अप्रैल 2026, भोपाल: मूंग की फसल पर पीला मोजेक से लेकर जड़ सड़न तक कई रोगों का खतरा, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी –  मूंग की फसल में इन दिनों पीला मोजेक, एन्थ्रेक्नोज, बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट, सरकोस्पोरा लीफ स्पॉट, पत्ती झुलसा और जड़ सड़न जैसे कई रोगों का खतरा बढ़ गया है। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और समय पर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि शुरुआती अवस्था में ही इन रोगों का नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

कृषि विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी में बताया गया है कि पीला मोजेक रोग सफेद मक्खी से फैलता है, जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और फूल-फल की संख्या कम हो जाती है। इसके नियंत्रण के लिए बीज उपचार थायोमिथाक्जाम 30 एफएस या इमिडाक्लोप्रिड 48 एफएस से करने की सलाह दी गई है। साथ ही 20 से 30 दिन की फसल पर थायोमिथाक्जाम 25 डब्ल्यूजी का छिड़काव करने और रोगग्रस्त पौधों को नष्ट करने की अपील की गई है।

एन्थ्रेक्नोज और बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट पर विशेष सतर्कता

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार एन्थ्रेक्नोज रोग में पत्तियों और फूलों पर काले-भूरे धब्बे बनते हैं, जिसके लिए कार्बोक्सिन+थिरम से बीज उपचार तथा थायोफिनेट मिथाइल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट बीज जनित रोग है, जिसमें पत्तियों पर भूरे धब्बे बनकर पौधा संक्रमित हो जाता है। इसके लिए रोगमुक्त बीज उपयोग करने और स्ट्रेप्टोसाइक्लिन तथा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के घोल से छिड़काव की सिफारिश की गई है।

लीफ स्पॉट, झुलसा और जड़ सड़न पर नियंत्रण के उपाय

सरकोस्पोरा लीफ स्पॉट में पत्तियों पर छोटे लाल-भूरे धब्बे बनते हैं, जिससे पत्तियां गिरने लगती हैं। इसके नियंत्रण के लिए थायोफिनेट मिथाइल या प्रोपिकोनाजोल के छिड़काव की सलाह दी गई है। पत्ती झुलसा और जड़ सड़न रोग में पौधे सूखने लगते हैं, जिसके लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस से बीज उपचार करने की बात कही गई है।

अन्य रोगों पर भी जारी की गई सलाह

कृषि विभाग ने रस्ट (गेरुआ) रोग और पाउडरी मिल्ड्यू से बचाव के लिए भी विशेष दवाओं के उपयोग की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर रोग नियंत्रण, बीज उपचार और फसल निगरानी से मूंग की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और उत्पादन में होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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