पश्चिम बंगाल के बजट में किसानों को बड़ी राहत: MSP से 200 रुपये ज्यादा कीमत, कृषि बिजली पर सब्सिडी
17 सितंबर 2026, कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बजट में किसानों को बड़ी राहत: MSP से 200 रुपये ज्यादा कीमत, कृषि बिजली पर सब्सिडी – पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने अपने पहले बजट में किसानों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। राज्य सरकार ने ऐलान किया है कि खरीफ सीजन में किसानों से फसलों की खरीद केंद्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 200 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा दर पर की जाएगी।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार के इस पहले बजट में कृषि, बागवानी और पशुपालन क्षेत्र पर खास जोर दिया गया है। वित्त मंत्री ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार खरीफ सीजन में किसानों से फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य से 200 रुपये अधिक कीमत पर करेगी, ताकि किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सके और उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से कुछ राहत मिले।
कृषि बिजली और आवंटन पर बड़ा फोकस
बजट में कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाली बिजली पर 2 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी देने के लिए 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे सिंचाई की लागत सीधे कम होगी और किसानों पर खेती की कुल लागत का बोझ घटेगा, खासकर उन इलाकों में जहां किसान बिजली से चलने वाले पंपों पर निर्भर हैं।
कृषि विभाग के लिए 8,565.84 करोड़ रुपये, कृषि विपणन के लिए 364.99 करोड़ रुपये और पशु संसाधन विकास विभाग के लिए 1,404.42 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। पशुपालन क्षेत्र पर यह बड़ा आवंटन बताता है कि सरकार दूध और मांस उत्पादन को भी किसानों की आय का अतिरिक्त जरिया बनाना चाहती है। बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पशुधन विकास और दार्जिलिंग में इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा
एमएसपी से ऊपर मिलने वाली 200 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त राशि सीधे किसान के खाते में पहुंचेगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा धान उत्पादक किसानों को मिलेगा, क्योंकि पश्चिम बंगाल देश के सबसे बड़े धान उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। राज्य सरकार की खरीद एजेंसियां किसानों से सीधे उपज खरीदेंगी, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है और छोटे किसानों तक भी इसका सीधा लाभ पहुंच सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह उसकी नई सरकार का पहला बजट है और आने वाले समय में किसानों के लिए और योजनाएं लाई जाएंगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि एमएसपी से ऊपर अतिरिक्त कीमत देने की यह पहल राज्य के किसानों को निजी व्यापारियों के बजाय सरकारी खरीद केंद्रों की ओर आकर्षित करेगी, जिससे आधिकारिक खरीद का दायरा भी बढ़ेगा।
पश्चिम बंगाल देश के सबसे बड़े धान उत्पादक राज्यों में शुमार है और यहां लाखों छोटे व सीमांत किसान परिवार धान की खेती पर ही निर्भर हैं। ऐसे में सरकारी खरीद पर मिलने वाला अतिरिक्त दाम इन परिवारों के लिए साल भर की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा तय कर सकता है। कृषि जानकारों का कहना है कि अगर यह अतिरिक्त भुगतान समय पर और सीधे किसानों तक पहुंचता है, तो आने वाले सीजन में राज्य में सरकारी खरीद केंद्रों पर पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
राज्य के कई किसान संगठनों ने बजट में मिली इस राहत का स्वागत किया है, हालांकि उनका कहना है कि असली फायदा तभी दिखेगा जब खरीद केंद्रों तक पहुंच आसान हो और भुगतान में देरी न हो। पिछले कुछ सालों में धान खरीद के दौरान भुगतान में देरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं, इसलिए किसान चाहते हैं कि इस बार अतिरिक्त 200 रुपये की राशि भी समय पर उनके खाते में पहुंचे। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि खरीद और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को पहले से ज्यादा पारदर्शी बनाया जाएगा।
एमएसपी से ऊपर अतिरिक्त भुगतान मिलने से पश्चिम बंगाल के छोटे और मझोले किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा, खासकर धान की खेती करने वाले किसानों को। बिजली सब्सिडी से सिंचाई लागत घटने पर किसान बेहतर बीज और उर्वरक में निवेश कर सकेंगे, जिससे राज्य में कृषि-इनपुट कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है और स्थानीय बीज-खाद विक्रेताओं के लिए मांग बढ़ सकती है।
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