मध्य प्रदेश विंध्याचल की हलचल

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25 जनवरी 2022,  मध्य प्रदेश विंध्याचल की हलचल –

आका की पौ बारह

प्रदेश में जब से नकली एवं अमानक कृषि आदान सामग्री जप्त करने तथा छापामार कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हंै तब से जिला, संभाग एवं ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की चाँदी होते-होते रह गई है। क्योंकि तीसरी आँख का साया हमेशा उन पर तथा व्यापारियों पर मंडराता रहता है। व्यापारी वर्ग काफी सहमा हुआ है कब कौन चपेट में आ जाए कहा नहीं जा सकता।
पूरे प्रदेश में अधिकारी-कर्मचारियों की तो ठीक है परन्तु उन पर तथा व्यापारियों पर जो तीसरी आँख भी लगी हुई है वह पल-पल की खबर आका को दे रही है। प्रदेश में जहां भी हलचल होती है तीसरी आँख वाले सक्रिय होकर बाजी पलट देते हैं और सभी देखते रह जाते हैं।

कोरोना का कोहराम

कृषि संचालनालय में कोरोना ने कोहराम मचा रखा है। हाईकमान से लेकर निचले स्तर तक के लोग चपेट में आ गए हंै। ऐसे में अगर किसी को छींक आ गई तो उसे अपराधी की नजर से देखा जाने लगा है। कई सीटें खाली पड़ी हंै। कुछ वास्तव में बीमार हंै और कुछ दहशत में बीमार हो गए हैं तथा कुछ एतिहात के तौर पर दूरी बनाए रखने के लिए अनुपस्थित हैं। काम-काज की गति धीमी हो गई है वैसे भी 5 दिन का कार्यालय हो गया है जिस कारण फाईलें जहां की तहां अटकी पड़ी हंै।

मंत्रालय की दौड़ में आगे

कृषि संचालनालय में एक अधिकारी ऐसे भी हंै जिनके पास काम की कोई कमी नहीं है। दिन भर मंत्रालय से संचालनालय और संचालनालय से मंत्रालय आने-जाने में दिन गुजर जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि पूरे विभाग का बोझ उन्हीं के कंधों पर है। दिखाने को तो सादा जीवन उच्च विचार का सिद्धांत अपनाए रहते हैं परन्तु यह भी सच है कि पूरे विभाग में वजनदार और मलाईदार शाखाएं भी उन्हीं की देखरेख में फल-फूल रही हैं।

छोटे मियां सुभान अल्लाह

कृषि संचालनालय में इन दिनों छोटे मियां का बोलबाला है। सबसे पावरफुल वही है। ए से लेकर जेड तक के काम करवाने के निर्देश देते हंै। काम नहीं होने पर खिंचाई करवाने की धमकी भी देते हैं। अधिकारी-कर्मचारी कानाफूसी कर कहते हैं कि बड़े मियां तो कुछ नहीं कहते परंतु छोटे मियां आग उगलने से बाज नहीं आते।

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