राज्य कृषि समाचार (State News)

इंदौर जिले में स्ट्रा रीपर संचालन से बढ़ी आजीविका

01 अप्रैल 2026, इंदौरइंदौर जिले में स्ट्रा रीपर संचालन से बढ़ी आजीविका – प्रदेश में संचालित ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इंदौर जिले के ग्राम धुलेट में महिलाओं ने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सराहनीय योगदान दिया है।

ग्राम धुलेट के द्वारिकाधीश आजीविका स्व सहायता समूह की सदस्य दीदी पपीता रावत द्वारा स्ट्रा रीपर मशीन का सफल संचालन किया जा रहा है। समूह ने 2 लाख 50 हजार रुपये की ऋण राशि से यह मशीन खरीदी, जिससे गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को भूसे में परिवर्तित किया जा रहा है। अब तक इस मशीन के माध्यम से लगभग 150 ट्रॉली भूसा तैयार किया जा चुका है, जिससे करीब 3 लाख 50 हजार रुपये की आय अर्जित की गई है। यह उपलब्धि न केवल समूह की आर्थिक सशक्तता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की क्षमता और मेहनत का भी प्रमाण है।

इस पहल से खेतों में नरवाई जलाने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है। साथ ही, ग्राम में पशुधन के लिए भूसा आसानी से उपलब्ध होने लगा है, जिससे पशुपालकों को भी सीधा लाभ मिल रहा है। पहले जिस पराली को बेकार समझकर जला दिया जाता था, वह अब आय का महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है। ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर दीदी पपीता रावत ने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि अन्य महिलाओं और ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं। उनका यह प्रयास गांव में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ सतत कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक पहल है। इस प्रकार, द्वारिकाधीश स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा यह कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय परिवर्तन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

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