परंपरागत खेती छोड़, अमरूद-सब्जी की आधुनिक खेती से कृषक धीरज ने बदली अपनी तकदीर
20 जनवरी 2026, रायसेन: परंपरागत खेती छोड़, अमरूद-सब्जी की आधुनिक खेती से कृषक धीरज ने बदली अपनी तकदीर – रायसेन जिले के किसान भाई परम्परागत खेती के अलावा अब उद्यानिकी या नगदी फसलों की आधुनिक तकनीक से खेती कर अपनी तकदीर बदल रहे हैं। विशेष रूप से युवा किसानों का अब अमरूद और सब्जी सहित अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती की ओर रूझान बढ़ा है। कहते हैं कि यदि युवा अपनी ऊर्जा और आधुनिक तकनीक को जोड़ दें, तो माटी सोना उगलने लगती है, रायसेन जिले के सांची विकासखंड के ग्राम नकतरा के धीरज सुरमा ने इस बात को सच कर दिखाया है। धीरज ने ना केवल अपनी मेहनत से खेती को लाभ का धंधा बनाया है, बल्कि जिला प्रशासन की पहल और कृषि विभाग के सहयोग से आज वे क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन गए हैं।
परंपरागत खेती छोड़, नवाचार को अपनाया
युवा किसान धीरज ने पारम्परिक फसलों के ढर्रे से हटकर कुछ नया करने की ठानी। उन्होंने अपने खेत के ढेड़ एकड़ हिस्से में ’ताइवान पिंक’ किस्म के अमरूद और एक एकड़ में सब्जी टमाटर, गोभी, मेथी, भिंडी आदि की आधुनिक खेती शुरू की। उन्नत किस्म के पौधों और सटीक प्रबंधन के कारण उन्हें उम्मीद से बेहतर गुणवत्ता और पैदावार प्राप्त हुई।
’आत्मा’ परियोजना बनी सफलता की आधारशिला
धीरज की इस सफलता के पीछे कृषि विभाग की ’आत्मा’ (ATMA) परियोजना का बड़ा योगदान है। परियोजना के विशेषज्ञों ने धीरज को मिट्टी परीक्षण से लेकर कीट प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई पद्धतियों की बारीकियों से अवगत कराया। कृषि विभाग के निरंतर मार्गदर्शन ने धीरज के आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें जोखिम लेने की शक्ति दी।
जैविक हाट : बिचौलियों से मुक्ति, सीधे मुनाफे की ओर
धीरज की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने जिला कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा की पहल पर जिले में शुरू किए गए ’जैविक हाट’ में अपने उत्पाद बेचना शुरू किया। यहाँ उन्हें बाजार के बिचौलियों से मुक्ति मिली और अपने शुद्ध, जैविक उत्पादों का सीधा लाभ मिला। स्थानीय ग्राहकों द्वारा उनके ताइवान पिंक अमरूद को हाथों-हाथ लिया गया, जिससे धीरज को सामान्य बाजार की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा प्राप्त हुआ।
अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए युवा किसान धीरज सुरमा कहते हैं कि खेती में अब अपार संभावनाएं हैं। बस जरूरत है सही जानकारी और आधुनिक तकनीक को अपनाने की। वह जिला प्रशासन और आत्मा परियोजना के आभारी है, जिन्होंने उन जैसे छोटे किसान को बाजार और तकनीक से जोड़कर सशक्त बनाया। युवा किसान धीरज की सफलता क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो यह साबित करती है कि खेती यदि सूझबूझ से की जाए, तो यह किसी भी बड़े व्यवसाय से कम नहीं।
युवा किसान धीरज ने बताया कि वह पहले पारम्परिक गेहूॅ, चना की खेती करते थे, लेकिन अब वह उन्नत तकनीक से पपीता, गिल्की, अमरूद, बेगन, मटर, लोकी आदि सब्जी उगाते हैं!
जिसमें वह मल्चिंग ड्रिप एवं वैज्ञानिक प्रबंधन का उपयोग करते हैं। साथ ही उत्पाद को सीधे जैविक हाट बाजार में विक्रय करते हैं। वह कहते है पारंपरिक खेती में गेहूँ और धान या चना की खेती होती थी जिससे सिर्फ घर का गुजारा होता था लेकिन सब्जी की खेती एवं अमरूद की खेती से आय सामान्यताः 2 से 3 गुना अधिक आय हो रही है एवं जिले मे लगने वाले जैविक हाट बाजार से मुनाफा और बड़ गया। जिससे हम सीधे ग्राहक को अपने उत्पाद बेच रहे है। धीरज जिले मे लगने वाले जैविक हाट बाजार से बहुत खुश है एवं वह जिला कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा और उप संचालक कृषि सह परियोजना संचालक आत्मा रायसेन को धन्यवाद देते हैं।
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