धान-गेहूं छोड़ एमपी के किसान ने अपनाई फूलों की खेती, अब हर महीने कर रहे 3 लाख तक की कमाई
05 फरवरी 2026, भोपाल: धान-गेहूं छोड़ एमपी के किसान ने अपनाई फूलों की खेती, अब हर महीने कर रहे 3 लाख तक की कमाई – कभी धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहकर सीमित आय अर्जित करने वाले ग्राम बरखेड़ा बोंदर के रामचरण कुशवाह आज फूलों और फलों की आधुनिक खेती से प्रतिमाह लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि किसान सशक्तिकरण और नवाचार की प्रेरक मिसाल है।
श्री कुशवाह का परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था, जिसमें बढ़ती लागत और कम लाभ के कारण आर्थिक चुनौतियां बनी रहती थीं। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास योजना की जानकारी मिली। उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना के अंतर्गत इस योजना का लाभ लेते हुए एक एकड़ भूमि में गुलाब, जरबेरा, गेंदा एवं संतरे की खेती प्रारंभ की। उन्होंने एक एकड़ में लगभग 5000 पौधों का रोपण किया तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाया, जिस पर उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के परिणामस्वरूप वे मात्र एक वर्ष में ही प्रतिदिन 1500 से 2000 फलों का उत्पादन कर बाजार में विक्रय करने लगे। फूलों और फलों की खेती ने श्री कुशवाह की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना दिया। आज वे प्रतिदिन ₹5 से ₹6 हजार तथा प्रतिमाह ₹2 से ₹3 लाख तक की आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
किसान कुशवाह कहते हैं, “ मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। सरकार की योजनाओं ने हमें आत्मनिर्भर बनाया है और समाज में एक नई पहचान दी है।” श्री रामचरण कुशवाह की यह सफलता कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं के सहयोग से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।
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