राज्य कृषि समाचार (State News)

बाजरे की उन्नत खेती पर किसान चौपाल आयोजित

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10 जुलाई 2024, राजस्थान: बाजरे की उन्नत खेती पर किसान चौपाल आयोजित – कृषि विज्ञान केन्द्र पोकरण द्वारा शुष्क क्षेत्रो में बाजरा की उन्नत खेती विषयक किसान चौपाल का आयोजन ग्राम मोडरडी में किया गया। क्षेत्र में इस समय बाजरे की बुवाई का कार्य चल रहा है तथा बाजरा की खेती किसान के साथ साथ पशु चारे में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। केन्द्र के अध्यक्ष डॉ दशरथ प्रसाद ने बताया कि बाजरा एक ऐसी फसल है जो कि विपरीत परिस्थितियो एवं सीमित वर्षा वाले क्षेत्रो तथा बहुत कम उर्वरको की मात्रा के साथ, जहाँ अन्य फसले अच्छा उत्पादन नही दे पाती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसमे सूखा सहन करने की अदभुत शक्ति होती है। बाजरा का बीज बारीक होन के कारण खेत को अच्छी तरह से तैयार करना चाहिए। केन्द्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ.कृष्ण गोपाल व्यास ने बताया कि एक गहरी जुताई के बाद 2-3 बार हल से जुताई कर खेत को समतल करना चाहिए, जिससे खेत मे पानी न रुक सके, साथ मे पानी के निकास की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। बुवाई के 15 दिन पूर्व 10-15 टन प्रति हेक्टेयर सडी गोबर की खाद डालकर हल द्वारा उसे भलीभॉती मिट्टी मे मिला देते हैं।

दीमक के प्रकोप की संभावना होने पर प्रति 25 कि.ग्रा./हेक्टेयर क्लोरोपायरीफॉस 1.5 प्रतिषत चूर्ण खेत मे मिलाये। वर्षा प्रारंभ होते ही जुलाई के दूसरे सप्ताह तक इसे कतारो मे बीज को 2-3 सेमी. गहराई पर बोना चाहिए। लाइन से लाइन 45 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 -15 सेमी. उपयुक्त होती है। केन्द्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ राम निवास ने देशी खाद के ऊपयोग पर जोर देते हुए बताया कि खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयरन एवं जिंक की मात्रा बाजरे की धनशक्ति, एच एचबी 299, आरएचबी 223 किस्मो में अन्य किस्मों से अधिक पायी जाती है जिससे की मानव स्वास्थ्य पर बदलते वातावरण में भी संतुलित पोषक तत्व प्राप्त हो सकें। शुष्क क्षेत्रो में बाजरे की खेती करने से एक ओर खाने हेतु पोष्टिक अनाज तो दूसरी ओर पशुओ के लिए चारा प्राप्त होता है। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को वर्षा जल आधारित खेती के लिए प्रोत्साहित करने के साथ साथ जैविक खेती, खरपतवारों को समय पर हटाना और बारिश के पानी से ही मिट्टी में नमी को लंबे समय तक बनाए रखने पर जोर दिया।

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