राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़ का कांकेर बना मत्स्य बीज उत्पादन का हब, निर्यात और रोजगार में दिखी जबरदस्त बढ़ोतरी

25 जुलाई 2025, भोपाल: छत्तीसगढ़ का कांकेर बना मत्स्य बीज उत्पादन का हब, निर्यात और रोजगार में दिखी जबरदस्त बढ़ोतरी – छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। यह जिला अब न केवल मत्स्य बीज उत्पादन में अग्रणी है, बल्कि देश के कई राज्यों को बीज सप्लाई करने वाला बड़ा केंद्र भी बन गया है। इससे जिले की अर्थव्यवस्था को नया बल मिला है। कुछ साल पहले तक कांकेर जिले को मत्स्य बीज के लिए पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब कोयलीबेड़ा विकासखंड के पखांजूर क्षेत्र में बड़ी संख्या में मत्स्य बीज की गाड़ियाँ, मत्स्य कृषक और सक्रिय हैचरियां हर जगह दिखाई देती हैं।

नील क्रांति और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का असर

यह बड़ा बदलाव नील क्रांति योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की मदद से आया है। इन योजनाओं के तहत पखांजूर क्षेत्र में मत्स्य बीज हैचरियों और तालाबों का निर्माण कराया गया, जिससे बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता आई। आज पखांजूर में मत्स्य बीज का सरप्लस उत्पादन हो रहा है।

अब स्थिति यह है कि कांकेर में तैयार किया गया उच्च गुणवत्ता वाला और किफायती मत्स्य बीज केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, गुजरात और बिहार जैसे राज्यों में भी निर्यात किया जा रहा है।

बीज की खासियत: सस्ता और जल्दी उपलब्ध

पखांजूर का बीज इसलिए भी खास है क्योंकि यह न सिर्फ औरों से सस्ता है, बल्कि अप्रैल–मई जैसे शुरुआती महीनों में ही किसानों को मिल जाता है। इससे किसानों को समय रहते मत्स्य पालन शुरू करने में मदद मिलती है।

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हैचरियों और उत्पादन का लक्ष्य

मत्स्य विभाग के सहायक संचालक के अनुसार, कांकेर जिले में कुल 34 मत्स्य बीज उत्पादन हैचरियां संचालित हैं। वर्ष 2025-26 में 337 करोड़ स्पॉन और 128.35 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राय के उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। फिलहाल जिले में 192 करोड़ स्पॉन और 7.42 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राय का उत्पादन हो चुका है।

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पंगेसियस सहित अन्य बीजों का भी उत्पादन

यहां की हैचरियों में मेजर कार्प मछलियों के अलावा पंगेसियस जैसी मछलियों का बीज भी तैयार किया जा रहा है। मत्स्य कृषक विश्वजीत अधिकारी और मृणाल बराई ने बताया कि क्षेत्र से प्रतिदिन 10–15 पिकअप वाहन मत्स्य बीज लेकर दूसरे जिलों और राज्यों में जाते हैं।

स्थानीय लोगों को मिला रोजगार

पखांजूर में मत्स्य बीज उत्पादन की इस सफलता ने करीब 550 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया है। बीज उत्पादन, परिवहन, बिक्री और उससे जुड़ी गतिविधियों से ग्रामीणों को अब स्थायी आय मिलने लगी है। आज कांकेर जिला छत्तीसगढ़ की मत्स्य समृद्धि का प्रतीक बन गया है। यहां की हैचरी क्रांति ने राज्य को बाहरी राज्यों पर निर्भरता से मुक्त कर दिया है और अब यह देशभर में गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज की पहली पसंद बन चुका है।

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