राज्य कृषि समाचार (State News)

रायसेन के किसान झल्कन सिंह ने प्राकृतिक खेती से पेश की मिसाल, बागवानी के साथ ‘इंटरक्रॉंपिंग‘ कर कमा रहे दोगुना लाभ

23 जनवरी 2026, रायसेन: रायसेन के किसान झल्कन सिंह ने प्राकृतिक खेती से पेश की मिसाल, बागवानी के साथ ‘इंटरक्रॉंपिंग‘ कर कमा रहे दोगुना लाभ – आज के दौर में जहां रासायनिक खेती से मिट्टी और स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है, वहीं रायसेन जिले के ग्राम मुक्तापुर (सांची) के एक प्रगतिशील किसान श्री झल्कन सिंह अपनी मेहनत और नवाचार से क्षेत्र में ‘प्राकृतिक खेती के नायक‘ बनकर उभरे हैं। झल्कन सिंह ने अपनी 3 एकड़ भूमि पर पूरी तरह से रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती ( Natural Farming ) अपनाकर अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल पेश किया है।

बहुआयामी कृषि मॉडल : बागवानी और सब्जियों का संगम

झल्कन सिंह ने अपने खेत के एक-एक इंच सदुपयोग करते हुए आम और अमरूद का विशाल बगीचा तैयार किया है। विशेष बात यह है कि उन्होंने केवल पेड़ों पर निर्भर न रहकर ‘इंटरक्रॉपिंग‘ (अंतर्वर्ती फसल) तकनीक को अपनाया है। वे इन फलदार वृक्षों के बीच खाली जगह में हल्दी, अदरक और लौकी जैसी सब्जियां सफलतापूर्वक उगा रहे हैं। इसके साथ ही 1 एकड़ में वे शुद्ध प्राकृतिक तरीके से गेंहू की खेती भी कर रहे है।

आत्मा परियोजना का सहयोग और प्रशिक्षण

झल्कन सिंह जी को आत्मा परियोजना के अधिकारियों बीटीएम और एटीएम द्वारा विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मृदा उर्वरता ( Soil Fertility ) को बढ़ाना और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करना था। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें निम्नलिखिल जैविक खाद और कीटनाशक बनाने की विधि सिखाई गई। मृदा स्वास्थ्य के लिए- जीवामृत और घनजीवामृत तथा जैविक कीटनाशक के रूप में- नीमास्त्र, अग्निअस्त्र और ब्रम्हास्त्र। कम लागत अधिक लाभ पहले झल्कन जी बाजार से मंहगे रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक खरीदते थे, जिससे खेती का खर्च बहुत अधिक रहता था और मिट्टी की गुणवत्ता भी धीरे-धीरे कम हो रही थी। 

आत्मा परियोना से जुडने के बाद लागत में कमी- घर पर ही उपलब्ध गाय के गोबर, गोमुत्र बेसन और गुड़ जैसी सामग्री से खाद औ कीटनाशक तैयार होने लगे। इससे बाजार पर निर्भरता खत्म हो गई। मृदा उर्वरता में सुधार- जीवामृत के उपयोग से मिट्टी में केंचुओं की संख्या बढ़ी और भूमि की जल धारण क्षमता में सुधार हुआ। बेहतर मुनाफा- लागत कम होने और शुद्ध लाभ ( Profit ) में वृद्धि हुई।

Advertisement
Advertisement

जैविक हाट से मिली नई पहचान और बेहतर दाम

किसान झल्कन सिंह बताते हैं कि पहले जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार ढूंढना पड़ता था, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए ‘जैविक हाट‘ ने उनकी चिंता दूर कर दी है। हाल ही में उन्होंने अपनी ताजी सब्जियां जैविक हाट में बेचीं, जहां उन्हें न केवल अच्छे दाम मिले, बल्कि उपभोक्ताओं की खूब सराहना भी मिलीं अब वे आने वाले आम के सीजन और वर्ततान सब्जियों की खेप को भी इसी हाट में बेचने के लिए उत्साहित है।

Advertisement
Advertisement

प्रशासन और कृषि विभाग का मिला सहयोग

किसान की मुस्कान का आधार ‘जैविक हाट‘ ग्राम मुक्तापुर के किसान श्री झल्कन सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय जिला प्रशासन की दूरगामी सोच को दिया है। विशेष रूप से जिला कलेक्टर महोदय के प्रति आभार प्रकट करते हुए वे कहते है। एक किसान के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी फसल का सही मूल्य पाना होता है। कलेक्टर महोदय द्वारा शुरू की गई जैविक हाट की पहल ने हमारी इस चिंता को दूर कर दिया है। यहां बिचौलियों का डर नहीं है और हमें अपने शुद्ध प्राकृतिक उत्पादों का सीधा लाभ मिल रहा है। इस मंच ने न केवल हमें आर्थिक संबल दिया, बल्कि समाज में ‘प्राकृतिक किसान‘ के रूप में एक नई पहचान भी दिलाई है। इस सराहनीय व्यवस्था के लिए मैं हद्य से जिला कलेक्टर महोदय सहित उपसंचालक कृषि केपी भगत तथा कृषि विभाग के अधिकारियों का धन्यवाद करता हूॅ। 

Advertisements
Advertisement
Advertisement

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

Advertisements
Advertisement
Advertisement