झाबुआ के किसान ने अपनाई आधुनिक खेती: इस सिंचाई तकनीक से फसल उत्पादन में भारी वृद्धि, अब कमा रहे लाखों
31 मार्च 2026, झाबुआ: झाबुआ के किसान ने अपनाई आधुनिक खेती: इस सिंचाई तकनीक से फसल उत्पादन में भारी वृद्धि, अब कमा रहे लाखों – मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के विकासखंड राणापुर के ग्राम डाबतलाई के कृषक श्री चैना रणजीत सिंगाड़ आज क्षेत्र में बदलाव और प्रगति की मिसाल बन चुके हैं। सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के कारण जहां पहले उनकी मेहनत को उचित लाभ नहीं मिल पाता था, वहीं अब आधुनिक तकनीक अपनाकर उन्होंने अपनी किस्मत बदल दी है।
वर्ष 2024-25 में उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पोर्टेबल स्प्रिंकलर प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें ₹10,887 का अनुदान मिला। यह उपकरण उनके लिए सिर्फ सिंचाई का साधन नहीं बल्कि एक नई शुरुआत साबित हुआ, जिसने उनकी खेती को नई दिशा दी।
योजना का लाभ लेने से पहले वे पारंपरिक खेती करते थे। सोयाबीन की फसल से उन्हें मात्र 4 क्विंटल उत्पादन मिलता था, जिसमें ₹6,000 की लागत के बाद कुल आय ₹13,000 और शुद्ध आय ₹7,000 ही रह जाती थी। इसी तरह गेहूं की फसल में 7.50 क्विंटल उत्पादन होता था, जिसमें ₹5,500 की लागत पर ₹17,500 की आय और ₹12,000 की शुद्ध कमाई होती थी। कुल मिलाकर मेहनत अधिक और लाभ सीमित था।
पोर्टेबल स्प्रिंकलर से बदली खेती की दिशा
पोर्टेबल स्प्रिंकलर के उपयोग से खेतों में सिंचाई की व्यवस्था बेहतर हुई, जिससे पानी का समुचित उपयोग संभव हो पाया। इस तकनीक की मदद से श्री सिंगाड़ ने पारंपरिक फसलों की जगह नगदी फसल भिंडी की खेती शुरू की, जिसने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया।
पहली फसल में उन्होंने 50 क्विंटल भिंडी का उत्पादन किया, जिसमें ₹30,000 की लागत पर ₹1,05,000 की कुल आय और ₹75,000 की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इसके बाद दूसरी फसल में उत्पादन बढ़कर 65 क्विंटल हो गया, जिसमें ₹32,000 की लागत पर ₹1,15,000 की आय और ₹83,000 की शुद्ध कमाई हुई।
कम संसाधनों में बड़ी सफलता की मिसाल
आज श्री चैना रणजीत सिंगाड़ की खेती न केवल अधिक उत्पादन दे रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी सशक्त बना रही है। जहां पहले कुछ हजार रुपये की आय होती थी, वहीं अब वे एक ही फसल से कई गुना अधिक लाभ कमा रहे हैं।
उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, आधुनिक तकनीक को अपनाना और फसल चयन में बदलाव किसानों की आय को कई गुना बढ़ा सकता है। श्री सिंगाड़ अब अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और उनकी कहानी “कम संसाधनों में भी बड़ा बदलाव” की एक सशक्त मिसाल है।
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