जबलपुर: जैविक कृषि और एकीकृत कृषि से समृद्धि की नई इबारत लिखते उमेश सिंह
24 सितंबर 2026, जबलपुर: जबलपुर: जैविक कृषि और एकीकृत कृषि से समृद्धि की नई इबारत लिखते उमेश सिंह – मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के विकासखंड सिहोरा के ग्राम मढ़ा बंजर के प्रगतिशील किसान उमेश सिंह क्षेत्र के कृषि जगत में बदलाव का प्रतीक बन गए हैं। पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच उमेश सिंह ने अपनी दूरदर्शिता, कड़े परिश्रम और वैज्ञानिक सोच से यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा में प्रयास किया जायें तो खेती को एक मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है।
फसल विविधीकरण को बनाया सफलता का आधार
उमेश सिंह की सफलता का मुख्य आधार “विविधीकरण” है। उन्होंने केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपनी लगभग पांच एकड़ भूमि का अधिकतम उपयोग करने के लिए दो वर्ष पहले एकीकृत कृषि मॉडल को अपनाया। वे अपने खेत में जैविक पद्धतियों का पालन करते हुए सब्जियों, गेहूं और मटर की उच्च गुणवत्ता वाली फसलें ले रहे हैं। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों को पूरी तरह त्यागकर उन्होंने न केवल मिट्टी की उर्वरा शक्ति को पुनर्जीवित किया है, बल्कि उपभोक्ताओं तक स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद भी पहुंचा रहे हैं।
धान के खेत में मछली पालन का प्रयोग
उमेश सिंह अपनी आय को दोगुना करने और जोखिम को कम करने के लिए पानी से भरे धान के खेत में मछली पालन भी कर रहे हैं। यह जलीय कृषि और भूमि कृषि का एक ऐसा बेहतरीन संयोजन है, जहां एक का अपशिष्ट दूसरे के लिए संसाधन का काम करता है, जिससे लागत न्यूनतम हो जाती है। उमेश सिंह ने अपने खेत से लगे करीब ढाई एकड़ के तालाब को भी किराये से ले लिया है और यहां भी वे मत्स्य पालन कर रहे हैं।
जैविक हाट में सीधे उपभोक्ताओं को बेच रहे उत्पाद
उमेश के सामने जैविक खेती और एकीकृत कृषि से तैयार अपने उत्पादों को सही बाजार और सही मूल्य दिलाना असली चुनौती थी। यहां भी उन्होंने रणनीतिक समझ का परिचय दिया। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के मार्गदर्शन में वे अपने सभी जैविक उत्पादों को कृषि उपज मंडी जबलपुर में प्रत्येक रविवार को लगाये जा रहे ‘जैविक हाट’ में सीधे उपभोक्ताओं को बेच रहे हैं। कृषि अधिकारियों की देखरेख ने उनके उत्पादों को विश्वसनीयता और ‘ब्रांड वैल्यू’ प्रदान की है। इस डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर मॉडल के कारण बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है, जिससे होने वाला पूरा मुनाफा सीधे उमेश सिंह के खाते में जाता है।
उमेश सिंह मढ़ा बंजर गांव के एक समृद्ध किसान ही नहीं, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बन चुके हैं। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि कृषि में उच्च प्रदर्शन प्राप्त करने के लिए बड़े-बड़े निवेशों से ज्यादा जरूरी सही प्रणाली और सही बाजार लिंकेज का होना है।
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