उर्वरक वितरण के पायलट प्रोजेक्ट में जबलपुर जिला भी शामिल
03 अक्टूबर 2025, जबलपुर: उर्वरक वितरण के पायलट प्रोजेक्ट में जबलपुर जिला भी शामिल – किसानों को उर्वरक वितरण की एक अक्टूबर से लागू की जा रही नई व्यवस्था ”किसान पंजीयन एवं उर्वरक वितरण प्रणाली” के पायलट प्रोजेक्ट में जबलपुर जिले को भी शामिल किया गया है। किसानों को सुगमता से समय पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से राज्य शासन के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा प्रारंभ की जा रही इस व्यवस्था के पायलट प्रोजेक्ट में जबलपुर जिले के अलावा शाजापुर और विदिशा जिले को भी शामिल किया गया है।
उप संचालक कृषि डॉ एस के निगम ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बताया कि उर्वरक वितरण की यह व्यवस्था मोबाइल नम्बर, आधार नम्बर एवं क्यूआर कोड पर आधारित है तथा ई-उपार्जन पोर्टल पर धान एवं गेहूं के उपार्जन के लिये पंजीयन करने की प्रक्रिया के समान है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था में सबसे पहले किसानों को आधार नम्बर का उपयोग कर अपना पंजीयन करना होगा। इसका आधार नम्बर से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के माध्यम से वेरिफिकेशन करना होगा।
उप संचालक कृषि के मुताबिक वेरिफिकेशन के बाद किसान की जानकारी के साथ भू-अभिलेख की जानकारी पोर्टल पर प्रदर्शित होगी। पोर्टल पर किसानों को यह दर्ज करना होगा कि कुल रकबे में से उनके द्वारा कौन-कौन सी फसल कितने रकबे में ली जा रही है। किसानों को यह जानकारी भी देनी होगी कि वह किसी सहकारी समिति का सक्रिय सदस्य है अथवा नहीं। समिति का सक्रिय सदस्य होने की स्थिति में वह अपनी समितिसे उर्वरक प्राप्त कर सकता है। फसल का विवरण अंकित करने पर किसानों को यूरिया, डीएपी, एनपीके जैसे उर्वरकों का चयन करना होगा।
उप संचालक कृषि ने बताया कि उर्वरक का चयन कर लिये जाने के बाद वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर उर्वरक की आवश्यकता की जानकारी किसानों को प्राप्त होगी। इसके बाद किसान स्लॉट बुकिंग की तरह उर्वरक विक्रेता का चयन कर सकेंगे। विक्रेता का चयन करने पर एक कूपन जनरेट होगा जिस पर क्यूआर कोड भी होगा। प्राप्त कूपन को किसान संबंधित उर्वरक विक्रेता को उपलब्ध करायेगा। उर्वरक विक्रेता क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। इससे किसान को उपलब्ध कराये जाने वाले उर्वरक की जानकारी प्रदर्शित होगी और विक्रेता द्वारा किसान को उर्वरक उपलब्ध कराया जायेगा। इसकी जानकारी तुरंत ही किसान के मोबाइल पर मैसेज के रूप में प्राप्त होगी। उप संचालक कृषि ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत उर्वरक प्राप्त किसानों को किसी भी प्रकार के टोकन की आवश्यकता नहीं होगी तथा डीलर, डबल लॉक केन्द्र या समिति का पहले ही चयन कर लिए जाने के फलस्वरूप उन्हें लाइन में भी नहीं लगना पड़ेगा।
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