पराली को जलाने के बजाय उसका ‘यूरिया उपचार’ करने की सलाह दी
15 फरवरी 2026, भोपाल: पराली को जलाने के बजाय उसका ‘यूरिया उपचार’ करने की सलाह दी – भले ही खेतों में पराली जलाने पर रोक लगी हुई हो लेकिन बावजूद इसके पराली जलाने से कतिपय किसानों द्वारा गुरेज नहीं किया जाता है. इसी बीच जगदलपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पराली जलाने की बजाय उसका यूरिया उपचार करने की सलाह दी है.
शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर ने एक ऐसी समाधानकारी पहल की है जो न केवल पर्यावरण बचाएगी बल्कि किसानों की जेब भी भरेगी। फसल अवशेष जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता को होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए वैज्ञानिकों ने कहा कि भारत में वर्तमान में चारे की भारी किल्लत है। इसे दूर करने के लिए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.एस. नेताम के मार्गदर्शन में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ (करके सीखना) सिद्धांत के तहत एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में सहायक प्राध्यापक डॉ. नीता मिश्रा ने कृषि छात्रों और किसानों को पैरा यूरिया उपचार का जीवंत प्रदर्शन करके दिखाया।
क्या है पराली का यूरिया उपचार
पैरा (पराली) कुट्टी: सबसे पहले एक क्विंटल पैरे को छोटे टुकड़ों (कुट्टी) में काट लें।
घोल तैयार करना: 4% यूरिया का घोल तैयार करें (यानी 100 किलो पैरे के लिए लगभग 4 किलो यूरिया)।
छिड़काव: पैरे की परतों पर इस घोल का समान रूप से छिड़काव करें।
वायुरहित भंडारण: इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर 3 सप्ताह (21 दिन) के लिए किसी वायुरहित स्थान या तिरपाल से ढक कर दबा दें।
उपयोग: 21 दिनों बाद इसे निकालकर कुछ देर हवा में सुखाएं और पशुओं को खिलाएं।
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