राज्य कृषि समाचार (State News)

पांढुर्ना में कपास उत्पादक किसानों से जिनिंग में अवैध वसूली

03 जनवरी 2026, (उमेश खोड़े, कृषक जगत ,पांढुर्ना): पांढुर्ना में कपास उत्पादक किसानों से जिनिंग में अवैध वसूली – किसानों को प्रकृति के अलावा तंत्र की अव्यवस्थाओं से भी जूझना पड़ता है। न चाहते हुए भी उन्हें अज्ञानतावश आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। ऐसा ही मामला पांढुर्ना का सामने आया है , जहां सीसीआई द्वारा खरीदे गए कपास को जिनिंग पहुंचाने के बाद किसानों से कपास की तुलाई और खाली कराई की अवैध वसूली की जा रही  है।  दूसरी ओर सीसीआई के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मंडी में सीसीआई को बेचे गए कपास को किसानों को सिर्फ जिनिंग तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है। इसके बाद किसानों को कोई शुल्क नहीं देना है। यदि ऐसी कोई लिखित शिकायत आती है, तो उसे विजिलेंस को भेजा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पांढुर्ना क्षेत्र में कपास का उत्पादन बहुत घट गया है।  जहां पहले एक एकड़ में कपास का 14 – 15  क्विंटल तक का उत्पादन होता था, वहीं इस बार 4 -5  क्विंटल / एकड़ ही रह गया है। किसान वैसे ही बढ़ती लागत और कम उत्पादन से परेशान है। ऐसे में जिनिंग मिलों द्वारा किसानों से अवैध वसूली कोढ़ में खाज की कहावत को चरितार्थ कर रही है। बता दें कि पांढुर्ना मंडी में सीसीआई द्वारा खरीदे गए कपास को पालीवाल जिनिंग और पारसनाथ जिनिंग में भेजा जाता है, जहां किसानों से कपास की तुलाई और खाली कराई की अवैध वसूली की जा रही है। किसानों ने अपनी पीड़ा कृषक जगत से साझा की।  चिचौली के किसान श्री भास्कर डिगरसे ने बताया कि गत दिनों सीसीआई द्वारा मेरा 16  क्विंटल से अधिक कपास खरीदा  ,जिसे पालीवाल  जिनिंग ,पांढुर्ना में मेरे द्वारा ले जाया गया, जहां मुझसे कांटे पर तुलाई के 100 रु और खाली कराई के 400 रु लिए गए। इसी तरह अम्बाड़ाखुर्द के श्री किसन घाटोड़े  के 24. 60  क्विंटल कपास की  ट्रॉली  खाली कराई के 600 रु और तुलाई कांटे के 100 रु लिए गए। जबकि पारसनाथ  जिनिंग  में 18. 5  क्विंटल कपास लेकर पहुंचे रायबासा के  किसान  श्री रोशन मधुकर पांसे से गाड़ी खाली कराई के 500  रु और कांटे पर तुलाई के 100  रु लिए गए। वहीं श्री रोशन कलम्बे  का कहना था कि कपास की तुलाई या खाली कराई के बारे में स्पष्ट जानकारी मंडी एवं व्यापारियों के यहां चस्पा की जाए और मंडी का जो धर्म कांटा कई दिनों से बंद पड़ा है, उसे शीघ्र चालू किया जाए। इससे किसानों को मंडी में तुलाई के बाद जिनिंग में ले जाने पर वहां वजन में कोई अंतर आएगा तो उसकी जानकारी मिल जाएगी।  इसी तरह पारसनाथ  जिनिंग में धावड़ीखापा की श्रीमती वनमाला मंसाराम खोड़े से  9.15  क्विंटल कपास की खाली कराई के 300 रु और  तुलाई के  50  रु लिए गए। इस संबंध में कतिपय किसानों ने अपर कलेक्टर श्री नीलमणि अग्निहोत्री के समक्ष कथन भी दर्ज़ कराए हैं। किसान मंसाराम खोड़े ने बताया कि पांढुर्ना में  8 % नमी  वाले कपास की  8010  रु / क्विंटल की दर से खरीदी की जा रही है , जबकि इसका  निर्धारित  भाव 8110 रु है। इससे किसानों को 100  रु / क्विंटल का नुकसान हो रहा है।  कपास के न्यूनतम मूल्य की पुनः समीक्षा की जाए और कम से कम 15  हज़ार रु / क्विंटल की दर निर्धारित की जाए  तभी  किसान के घाटे की पूर्ति हो पाएगी।

अधिकारियों के कथन – श्री राजाराम उइके, सचिव, कृषि उपज मंडी ,पांढुर्ना ने जहां मंडी एक्ट में अनाज की हम्माली /तुलाई पर 10 रु / क्विंटल किसानों  से लेने का प्रावधान होने और सीसीआई द्वारा कपास तुलाई / हम्माली के बारे में अनभिज्ञता जताई , वहीं श्री के एल बघेल ,सीसीआई केंद्र प्रभारी , पांढुर्ना ने  बताया कि किसान द्वारा जिनिंग गेट पर कपास लाने के बाद सीसीआई की कोई भूमिका नहीं होती है। कपास की खाली कराई और तुलाई से लेकर उसकी गठानें बनाकर सीसीआई को देने की जिम्मेदारी जिनिंग वालों की रहती है। यदि किसानों से कपास की खाली कराई और तुलाई  की राशि ली जा रही है , तो जानकारी लेकर बताता हूं। जबकि श्री शुभम शुक्ला ,ब्रांच मैनेजर ,सीसीआई , इंदौर ने कृषक जगत को बताया कि कपास की तुलाई और हम्माली सीसीआई नहीं देती है। न ही किसानों को देने की ज़रूरत है। यदि किसी जिनिंग द्वारा वसूली की जा रही है, तो उसकी नामजद शिकायत  करने पर जांच  की जाएगी और मामला विजिलेंस को दे दिया जाएगा।

वहीं दूसरी तरफ पालीवाल जिनिंग में कपास खाली करने वाले मजदूर श्री गणेश कुमार का कहना था कि खाली करवाई की राशि कंपनी ( जिनिंग ) नहीं देती है और न ही सीसीआई देगी, तो फिर हमारी मजदूरी का पैसा कौन देगा ? किसान तो खाली करने या तौलने से रहा। जिनिंग में जो भी कपास लेकर आता है, चाहे वह व्यापारी हो या किसान , खाली कराई का पैसा उसे ही देना पड़ता है। यहां  ठेकेदारी के तहत सभी मजदूर कार्य करते हैं। पालीवाल जिनिंग के संचालक श्री सचिन पालीवाल ने इस विषय  में  किसी भी किसान  द्वारा व्यक्तिगत शिकायत नहीं करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया, वहीं  दूसरी ओर गत दिनों  पारसनाथ  इंडस्ट्रीज प्रा लि , पांढुर्ना द्वारा  गत दिनों जिनिंग में एक सूचना चस्पा  की गई जिसमें  कपास  किसानों से कोई भी शुल्क नहीं लेने और किसी के द्वारा राशि मांगने पर इसकी तत्काल शिकायत फैक्ट्री मैनेजर /मालिक अथवा सेंटर इंचार्ज से करने की बात  कही गई है ।  प्रशासन के दबाव में भले ही यह सूचना चस्पा की गई हो , लेकिन कपास किसानों से तुलाई /कपास खाली कराई की वसूली में जिनिंग वालों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। जबकि  नियम और  व्यावहारिक प्रक्रिया  की विरोधाभासी  स्थिति में  फंसे प्रभावित किसान सोच रहे हैं कि उनसे जबरन वसूली गई रकम क्या उन्हें वापस मिल पाएगी ? या हमेशा की तरह यूँ ही खाली हाथ रहेंगे ?

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