हरियाणा की नई खाद नीति: MFMV पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, बिना पंजीयन के नहीं मिलेगी खाद
11 दिसंबर 2025, भोपाल: हरियाणा की नई खाद नीति: MFMV पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, बिना पंजीयन के नहीं मिलेगी खाद – हरियाणा सरकार ने किसानों के लिए खाद वितरण व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया है। अब किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए ‘मेरी फसल–मेरा ब्यौरा’ (MFMV) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। कृषि विभाग ने यह नई नीति राज्य भर में लागू कर दी है, जिसका उद्देश्य खाद की सही तरीके से आपूर्ति सुनिश्चित करना और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है।
नई व्यवस्था की शुरुआत
राज्य सरकार ने इस नई व्यवस्था की शुरुआत पहले पंचकूला में की थी, जो सफल रही। इसके बाद अब इसे पूरे हरियाणा में लागू किया गया है। इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद ही किसान खाद प्राप्त कर सकेंगे। अगर किसी किसान का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं है, तो उसे खाद नहीं मिलेगी, चाहे वह किसी भी कृषि उत्पादक क्षेत्र से हो।
फायदा और उद्देश्य
इस पोर्टल को लेकर हरियाणा सरकार का कहना है कि इससे खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी और किसानों को बिना किसी दिक्कत के खाद मिल सकेगी। पहले किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ता था और कई बार भ्रष्टाचार और खाद की हेराफेरी की शिकायतें सामने आती थीं। अब यह नया सिस्टम इन समस्याओं को खत्म करने का प्रयास करेगा।
रजिस्ट्रेशन के बाद, किसानों को उनकी फसल और भूमि का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपडेट करना होगा, साथ ही आधार से जुड़ा बैंक खाता विवरण भी जरूरी होगा। यह सिस्टम खाद वितरण को पूरी तरह से डिजिटल बना देगा, जिससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि खाद वितरण में होने वाली गड़बड़ी भी रोकी जा सकेगी।
खाद की हेराफेरी पर रोक
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि खाद की हेराफेरी, काला बाजारी और अवैध आपूर्ति पर नियंत्रण लगेगा। रियल-टाइम निगरानी और खरीद सीमा तय करने से गलत तरीके से खाद बेचने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी। पिछले कुछ महीनों में इस नीति के कारण खाद की चोरी और अवैध कारोबार में भारी कमी आई है।
पंजीकरण से मिलने वाली राहत
सरकार के अनुसार, 90% किसान बिना किसी परेशानी के खाद प्राप्त कर चुके हैं, और यह प्रक्रिया अब पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त होगी। पहले जहां बड़े किसान ही ज्यादा खाद खरीदने में सक्षम थे, अब छोटे किसान भी बिना किसी भेदभाव के खाद प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, खाद की खपत भी कम हुई है, जिससे सरकार ने 351.90 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचाई है।
किसानों के अनुभव में बदलाव
इस नीति से किसान अब न केवल बिना लंबी कतारों में खड़े हुए खाद प्राप्त कर सकेंगे, बल्कि वे इस प्रक्रिया पर ज्यादा भरोसा भी करेंगे। इससे उनके अनुभव में भी सुधार होगा और खाद की सही खपत सुनिश्चित होगी। अब खाद सीधे उन किसानों तक पहुंचेगा जो उसकी असली जरूरत रखते हैं।
केंद्र सरकार ने सराहा
कृषि मंत्री ने बताया कि 3 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित केंद्र सरकार की बैठक में हरियाणा की इस नई खाद नीति को सराहा गया। अधिकारियों ने इसे अन्य राज्यों में लागू करने के लिए प्रेरित किया, ताकि खाद वितरण में पारदर्शिता और सही तरीके से आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
आगे का रास्ता
कृषि मंत्री के अनुसार, इस नई व्यवस्था के बाद हरियाणा में 2.5 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बचत की उम्मीद है, जिससे सरकार को 1,030 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी की बचत हो सकती है। यह व्यवस्था आने वाले समय में और अधिक प्रभावी होगी, और इसके परिणाम जनवरी 2026 तक और बेहतर होने की उम्मीद है।
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