हरियाणा: ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल फिर खुला, वंचित किसान 27 सितंबर तक करा सकेंगे खरीफ पंजीकरण
24 सितंबर 2026, चंडीगढ़: हरियाणा: ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल फिर खुला, वंचित किसान 27 सितंबर तक करा सकेंगे खरीफ पंजीकरण– हरियाणा के उन किसानों के लिए राहत भरी खबर है जो खरीफ सीजन 2026 में अपनी फसल का पंजीकरण नहीं करा पाए थे। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) पोर्टल को दोबारा खोल दिया है। यह पोर्टल 21 सितंबर से 27 सितंबर 2026 तक सक्रिय रहेगा, यानी वंचित किसानों के पास अब सिर्फ चार दिन बचे हैं।
इस पोर्टल की मूल डेडलाइन 31 जुलाई 2026 थी। बड़ी संख्या में किसान उस समय पंजीकरण नहीं करा सके थे। इसी को देखते हुए विभाग ने किसान हित में पोर्टल फिर से खोलने का फैसला लिया है।
किसे मिलेगा फायदा
यह सुविधा केवल उन किसानों के लिए है जिन्होंने अब तक खरीफ 2026 सीजन की फसल का पंजीकरण नहीं करवाया है। जिन किसानों की जमीन पहले से पंजीकृत है, वे दोबारा पंजीकरण नहीं करा सकते।
पंजीकरण करा चुके किसान ही अपनी उपज सरकारी मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेच सकते हैं। बिना पंजीकरण के किसान अपनी फसल MSP पर नहीं बेच पाएंगे, जिससे उन्हें खुले बाजार भाव पर निर्भर रहना पड़ सकता है। यही वजह है कि विभाग इस मौके को गंभीरता से लेने की सलाह दे रहा है।
मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल हरियाणा सरकार की उस डिजिटल व्यवस्था का हिस्सा है, जिसके जरिए राज्य में बोई गई फसल, रकबे और किसान की पूरी जानकारी एक जगह दर्ज होती है। यही आंकड़े आगे चलकर सरकारी खरीद केंद्रों, फसल बीमा और अन्य किसान-कल्याण योजनाओं का लाभ तय करने में इस्तेमाल होते हैं।
राज्य में हर साल खरीफ सीजन के दौरान धान, बाजरा और अन्य फसलों की सरकारी खरीद इसी पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर तय मंडियों में होती है। जिन किसानों का ब्यौरा दर्ज नहीं होता, उनकी उपज बिना पंजीकरण मंडी में स्वीकार नहीं की जाती, इसलिए हर सीजन में यह पंजीकरण एक जरूरी औपचारिकता बन चुका है।
कैसे और कहां कराएं पंजीकरण
जो किसान समय पर पंजीकरण नहीं करा सके, उन्हें अपना आवेदन अपने क्षेत्र के संबंधित एसडीएम (उपमंडल अधिकारी) कार्यालय में जमा करना होगा। विभागीय निर्देशों के मुताबिक, जमा किए गए आवेदन का सत्यापन अधिकतम तीन दिन के भीतर पूरा करना अनिवार्य है, ताकि किसानों को देरी का सामना न करना पड़े।
चूंकि पोर्टल केवल एक सप्ताह के लिए खुला है, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को बिना देरी किए तुरंत अपने नजदीकी एसडीएम कार्यालय में संपर्क कर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए, क्योंकि डेडलाइन आगे बढ़ने की कोई गारंटी नहीं है।
पंजीकरण के लिए किसानों को आमतौर पर आधार कार्ड, भूमि से जुड़े दस्तावेज और बैंक खाते की जानकारी साथ ले जानी होती है, ताकि सत्यापन प्रक्रिया में देरी न हो। कई किसान संगठनों ने भी विभाग से अपील की है कि जरूरत पड़ने पर पोर्टल की समयसीमा में थोड़ी और छूट दी जाए, ताकि दूरदराज के गांवों के किसान भी बिना परेशानी के पंजीकरण करा सकें।
MFMB पोर्टल पर पंजीकरण न होने की स्थिति में किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज एमएसपी पर नहीं बेच पाते, जिससे उन्हें खुले बाजार में कम कीमत मिलने का खतरा रहता है। धान और अन्य खरीफ फसलों की कटाई का सीजन नजदीक है, ऐसे में पंजीकरण सीधे तौर पर किसान की आमदनी से जुड़ा मामला है।
कृषि-इनपुट कारोबार और मंडी व्यापारियों के लिए भी यह जानकारी उपयोगी है, क्योंकि पंजीकृत किसानों की संख्या से आने वाले सीजन में सरकारी खरीद के अनुमानित रकबे और मंडी में आवक का अंदाजा मिलता है। बीज व खाद विक्रेता भी इन आंकड़ों से अगले सीजन की मांग का अंदाजा लगाते हैं।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


