उदयपुर में फसलों में जिंक की कमी दूर करने के लिए किसानों के लिए ग्लोबल पहल

Share

16 अप्रैल 2022, उदयपुर: गत सप्ताह उदयपुर के मदार गॉव में ‘‘खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फसलों में जिंक संवर्धन परियोजना‘‘ पर एक दिवसीय किसान गोष्ठी एवं प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन अन्तर्राष्ट्रीय जिंक एसोसियशन, यूसए एवं नई दिल्ली तथा महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा किया गया। किसान गोष्ठी में दक्षिण एशिया- जिंक न्यूट्रिन्ट इनिसियटिव, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. सौमित्र दास ने कहा कि जिंक की  कमी एक गॉव, जिले, राज्य की समस्या नहीं है, यह पूरे विश्व कि 50 प्रतिशत मृदाओं में एक  वैश्विक समस्या है । साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों में जिंक की  कमी से कुपोषण जैसी बीमारियॉ हो जाती है।

महत्वपूर्ण खबर: देश में महंगे विदेशी कीटनाशकों को लाने की साजिश: कृष्णबीर चौधरी

उन्होनें कहा कि संतुलित उर्वरक के साथ जिंक का प्रयोग करना अति आवश्यक है और राजस्थान की मिट्टी कैल्शियम युक्त होने के कारण 50 प्रतिशत से अधिक खेत जिंक की कमी से अधिक प्रभावित है। डॉ. एस. के. शर्मा निदेशक अनुसंधान, महाराणा प्रताप कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर मुख्य अतिथि थे। प्रतिभागियों को अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए मिट्टी में सभी प्रमुख एवं सूक्ष्म तत्वों की पर्याप्त मात्रा में उपस्थिति बहुत आवश्यक है।

राष्ट्रीय स्तर पर 40 प्रतिशत और राजस्थान राज्य में 60 प्रतिशत मिट्टी में जिंक की कमी दर्ज की गई है। साथ ही उन्होनें कहा कि यदि देखा जाए तथा पौधे के भाग में 190 ग्राम भूसे में, 20 ग्राम जड़ में  एवं 100 ग्राम दाने द्वारा प्रति हेक्टर जिंक का भूमि से शोषण होता है। उन्होंने कहा कि जिंक की कमी से गेहूं एवं मक्का की फसलें विशेष प्रभावित होती है अतः बीज उपचार, मृदा उपचार तथा पर्णीय छिड़काव कर जिंक की कमी पूरी करनी चाहिए। डॉ. रेखा व्यास, क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान, कृषि अनुसंधान केंद्र, उदयपुर ने कहा कि जस्ते की कमी से बच्चों में दस्त, शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर, त्वचा का खराब होना, हड्डियों का कमजोर होना आदि लक्षण दिखते है।

डॉ. अरविन्द वर्मा, सह अनुसंधान निदेशक ने कहा कि पौधों को 17 एवं मानव स्वास्थ्य के लिए 25 पोषण तत्वों की जरूरत होती है । उन्होनें कहा कि यदि गेहूं एवं मक्का कि फसलों में जस्ते की  कमी दिखाई देने पर जस्ता युक्त उवर्रकों का प्रयोग करना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. गजानन्द जाट, परियोजना प्रभारी, डॉ. देवेंद्र जैन, सहायक आचार्य एवं श्री निर्भय सिंह देवड़ा, सरपंच, वरड़ा ने भाग लिया। डॉ. रोशन चौधरी, सहायक आचार्य ने कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में  मदार गॉव के 60 किसानों ने  भाग लिया।

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.