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किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)राज्य कृषि समाचार (State News)

संघर्ष से सफलता तक: ग्रीन हाउस ने बदली किसान जगदीश की किस्मत, आज 4 लाख रुपए तक पहुँची आय  

29 अप्रैल 2026, भोपाल: संघर्ष से सफलता तक: ग्रीन हाउस ने बदली किसान जगदीश की किस्मत, आज 4 लाख रुपए तक पहुँची आय – मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के विकासखंड थांदला के छोटे से ग्राम सुतरेटी (मछलईमाता) में रहने वाले कृषक जगदीश पिता गंगाराम की कहानी केवल खेती की नहीं, बल्कि हौसले, बदलाव और उम्मीद की कहानी है। यह कहानी उस किसान की है जिसने परिस्थितियों से समझौता करने के बजाय उन्हें बदलने का साहस दिखाया।

कभी पारंपरिक खेती करते हुए श्री जगदीश गेहूँ और सोयाबीन की फसल पर निर्भर थे। मेहनत के बावजूद सीमित उत्पादन और कम आय उनके सामने चुनौती बनी हुई थी। 12 क्विंटल उपज, 15,000 रुपये की लागत और 48,000 रुपये की कुल आय में से केवल 35,000 रुपये की शुद्ध आय ही उनके हाथ लग पाती थी। इतनी कम आय में परिवार की जरूरतें पूरी करना, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता हमेशा उनके मन में बनी रहती थी।

लेकिन कहते हैं कि जब इंसान ठान ले, तो हालात भी बदल जाते हैं। वर्ष 2024-25 में श्री जगदीश को ‘संरक्षित खेती (MIDH)’ योजना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने हिम्मत जुटाई और इस योजना के अंतर्गत 4000 वर्ग मीटर का ग्रीन हाउस स्थापित करने का निर्णय लिया। शासन से 16,88,000 रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ, जिसने उनके इस बड़े कदम को मजबूत आधार दिया।

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ग्रीन हाउस की स्थापना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। उन्होंने इसके भीतर खीरे की उन्नत खेती शुरू की। शुरुआत में थोड़ी आशंका थी-नई तकनीक, नई जिम्मेदारियाँ लेकिन उनके हौसले और सीखने की लगन ने हर चुनौती को आसान बना दिया।

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धीरे-धीरे मेहनत रंग लाने लगी। जहाँ पहले सीमित उत्पादन होता था, वहीं अब उनकी फसल 3000 क्विंटल तक पहुँच गई। यह बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं था, बल्कि उनके जीवन की दिशा बदलने वाला था। अब 2,50,000 रुपये की लागत पर उन्हें 6,50,000 रुपये की आय होने लगी, जिससे उनकी शुद्ध आय बढ़कर 4,00,000 रुपये हो गई। इस आर्थिक उन्नति ने उनके जीवन में नई रोशनी भर दी।

अब उनके घर में खुशहाली है, बच्चों की पढ़ाई बेहतर हो रही है और भविष्य के प्रति एक नया विश्वास जागा है। श्री जगदीश अब केवल एक किसान नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। आसपास के किसान भी उनसे सीखने और संरक्षित खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

श्री जगदीश की यह यात्रा हमें सिखाती है कि बदलाव से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसे अपनाना चाहिए। सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का लाभ और निरंतर मेहनत किसी भी किसान के जीवन को नई दिशा दे सकती है।

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