मत्स्य पालन बनेगा मध्य प्रदेश की नई आर्थिक ताकत, 9 हजार करोड़ के निवेश से खुलेंगे रोजगार के नए द्वार
24 जून 2026, भोपाल: मत्स्य पालन बनेगा मध्य प्रदेश की नई आर्थिक ताकत, 9 हजार करोड़ के निवेश से खुलेंगे रोजगार के नए द्वार – मध्यप्रदेश सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त आधार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के प्रभाव से प्रदेश में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। यह निवेश केवल मत्स्य उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे हजारों युवाओं और मछुआ समुदाय के लिए रोजगार, स्वरोजगार और आय के नए अवसर भी विकसित होंगे।
मंत्रालय में आयोजित मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मछली उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण मछली बीज की उपलब्धता, आधुनिक हैचरी, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण इकाइयों तथा विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन को वैज्ञानिक तकनीक और आधुनिक संसाधनों से जोड़कर इसे एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जाना चाहिए।
प्रदेश में बड़ी संख्या में तालाब, जलाशय और नदियां उपलब्ध हैं, जिनका समुचित उपयोग कर मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। नई नीति के माध्यम से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे अत्याधुनिक मत्स्य परियोजनाएं विकसित होंगी। इसके साथ ही मछुआरों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता तथा आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मत्स्य पालन को कृषि और पशुपालन की तरह प्राथमिकता दी जाए तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले की जल क्षमता के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित किए जाएं तथा मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मत्स्य आधारित उद्योगों के विकास और निर्यात की संभावनाओं पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
नई मत्स्योद्योग नीति के माध्यम से मध्य प्रदेश न केवल देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा, बल्कि यह क्षेत्र ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि का नया आधार भी बनेगा। सरकार की यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में मत्स्य पालन प्रदेश की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनने जा रहा है।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 938 केज (Cage Culture) प्रस्तावों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केज कल्चर तकनीक के विस्तार से जलाशयों और बड़े जल स्रोतों में व्यावसायिक मछली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे प्रदेश के मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
हर जिले में विकसित होगी मछली हैचरी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि आगामी ढाई वर्षों में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए कि मध्यप्रदेश को मछली बीज के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े।
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