Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

प्राकृतिक आपदा से फसल क्षति होने पर किसानों को मिलेगा अग्रिम बीमा राहत भुगतान

फसल नुकसान के आकलन के लिए जिला स्तरीय संयुक्त समिति गठित

16 अक्टूबर 2026, पांढुर्ना: प्राकृतिक आपदा से फसल क्षति होने पर किसानों को मिलेगा अग्रिम बीमा राहत भुगतान – प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति होने की स्थिति में प्रभावित बीमित किसानों को अग्रिम बीमा दावा भुगतान उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तरीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है।

पांढुर्ना जिले में खरीफ एवं रबी मौसम के दौरान प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों से होने वाली फसल क्षति का पारदर्शी एवं समयबद्ध आकलन सुनिश्चित किया जाएगा। समिति प्राकृतिक आपदाओं, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, दीर्घकालीन सूखे तथा कीट प्रकोप जैसी परिस्थितियों में फसल नुकसान का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करेगी।

सात दिवस के भीतर समिति की बैठक अनिवार्य  – जिले में किसी भी प्रतिकूल मौसमी घटना के घटित होने के सात दिवस के भीतर जिला स्तरीय संयुक्त समिति (डीएलजेसी) की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी। मध्य-मौसम प्रतिकूलता की स्थिति में यदि खड़ी फसल की अपेक्षित औसत उपज की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान की आशंका हो, तो समिति प्रभावित बीमा इकाइयों में न्यूनतम 5 प्रतिशत बोए गए क्षेत्र तथा कम से कम 10 रैंडम स्थानों पर स्थलीय निरीक्षण करेगी। आकलन के आधार पर 25 प्रतिशत ऑन-अकाउंट अग्रिम राहत स्वीकृत करने के लिए राज्य स्तरीय समिति को अनुशंसा भेजी जाएगी।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

बुवाई विफल होने पर भी होगा सत्यापन –  प्रतिकूल मौसम के कारण अधिसूचित बीमा इकाई के 75 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में बुवाई या अंकुरण विफल होने की स्थिति में समिति निर्धारित समय-सीमा के भीतर स्थलीय सत्यापन करेगी। सत्यापन के बाद 25 प्रतिशत एकमुश्त दावा भुगतान के लिए राज्य शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

फसल कटाई के बाद नुकसान का भी होगा आकलन –  स्थानीयकृत आपदा तथा कटाई के बाद फसल क्षति के मामलों में भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नुकसान का आकलन किया जाएगा। ओलावृष्टि, जलभराव अथवा खेत में सूखने के लिए रखे फसल बंडलों को बारिश से नुकसान होने पर, यदि संबंधित बीमा इकाई का 25 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र प्रभावित होता है, तो समिति निर्धारित नमूना सर्वेक्षण के आधार पर क्षति का प्रतिशत तय करेगी। इसके अनुसार अधिकृत बीमा कंपनी के माध्यम से किसानों को दावों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित कराया जाएगा।

मौसम संबंधी आंकड़ों से रिपोर्ट का होगा सत्यापन-  समिति फसल क्षति आकलन की रिपोर्ट को प्रमाणिक बनाने के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), स्वचालित मौसम केंद्रों, उपग्रह, रिमोट सेंसिंग आंकड़ों तथा खेतों के फोटोग्राफ का तकनीकी विश्लेषण करेगी।

जिला स्तरीय समिति में ये होंगे शामिल – समिति के अध्यक्ष कलेक्टर जिला पांढुर्ना  होंगे। उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग सदस्य सचिव रहेंगे। इसके अतिरिक्त सभी अनुभागों के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, मौसम वैज्ञानिक अथवा कृषि मौसम वेधशाला के प्रभारी अधिकारी, लीड बैंक मैनेजर अथवा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी अथवा कृषि बीमा कंपनी के जिला प्रबंधक तथा जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा नामांकित तीन किसान प्रतिनिधि समिति के सदस्य होंगे। किसान प्रतिनिधियों में  पांढुर्ना  के श्री सीताराम कोरडे तथा सौंसर के श्री जयदेव मोहोड़ एवं श्री वैभव बूटे शामिल हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रतिकूल मौसम से प्रभावित बीमित किसानों की फसल क्षति का समय पर आकलन कर नियमानुसार अग्रिम राहत एवं बीमा दावा भुगतान की प्रक्रिया को प्रभावी बनाना है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture