राज्य कृषि समाचार (State News)

नरवाई प्रबंधन के अंतर्गत जागरूक हो रहे जिले के किसान

स्‍ट्रॉरीपर के माध्‍यम से हो रहा नरवाई प्रबंधन

28 फरवरी 2026, उज्जैन: नरवाई प्रबंधन के अंतर्गत जागरूक हो रहे जिले के किसान –  मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप जिले में नरवाई प्रबंधन के लिए निरंतर सार्थक प्रयास किए जा रहे है। कलेक्‍टर  रौशन कुमार सिंह के निर्देश अनुसार किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है।

 इस उद्देश्य से गत दिनों जिला स्‍तरीय बैठक आयोजित की गई। साथ ही तहसील स्‍तर पर भी किसानों और हार्वेस्टर संचालकों की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सहायक कृषि यंत्री, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा किसानों से लगातार चर्चा की जा रही है। बैठक में नरवाई प्रबंधन के लिए नरवाई में आग लगाने से रोकने के लिए नरवाई जलाने के पश्चात खेत में होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।

नरवाई प्रबंधन के सार्थक परिणाम दिखाई दे रहे है। जिले के किसान अब इसके प्रति जागरूक हो रहे है। हार्वेस्टर संचालकों द्वारा फसल कटाई के दौरान स्‍ट्रॉरीपर एवं अन्‍य स्‍ट्रॉ मेनेजमेंट मशीनों का उपयोग कर प्रयोग कर रहे है। जिससे फसल अवशेषों को भूसे के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। यह भूसा सीधे किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उन्हें पशुओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाला चारा प्राप्त हो रहा है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिल रहा है।

उल्लेखनीय है कि रबी फसल की कटाई का कार्य प्रारंभ हो चुका है। नरवाई प्रबंधन के अंतर्गत कृषि विभाग ने हार्वेस्टर संचालकों के साथ बैठकें की है। अब हार्वेस्टर मशीनों में एकीकृत स्ट्रॉ मैनेजमेंट उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। कटाई प्रक्रिया में स्ट्रॉ को काटकर, पीसकर या बंडल बनाकर भूसे के रूप में तैयार किया जाता है और किसानों को तुरंत सौंप दिया जाता है।

इससे प्राप्त होने वाला भूसा पशु चारे के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जो बाजार में बेचने पर अतिरिक्त आय प्रदान करता है। किसानों को सस्ता और पौष्टिक चारा उपलब्ध होने से दुग्ध उत्पादन और पशु स्वास्थ्य में वृद्धि होगी। साथ ही नरवाई प्रबंधन से पराली जलाने से होने वाले धुएं और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सकेगा।  नरवाई प्रबंधन में भूसे को खेत में ही मिलाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करता है।

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